- पांच तहसीलों में अलग-अलग स्थानों पर बनाई गईं आपदा की काल्पनिक परिस्थितियां
- एनसीसी कैडेट, आपदा मित्र, युवा आपदा मित्र और स्काउट गाइड ने निभाई अहम भूमिका
सिद्धार्थनगर। भूकंप, अग्निकांड और अन्य आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए बुधवार को जिले की पांच तहसीलों में राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाइज-2026 का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित पूर्वाभ्यास में विभिन्न स्थानों पर आपदा की काल्पनिक परिस्थितियां तैयार कर संबंधित विभागों की तैयारियों, त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय को परखा गया। मॉक एक्सरसाइज में एनसीसी कैडेट, आपदा मित्र, युवा आपदा मित्र और स्काउट गाइड ने भी भाग लिया।
जिलाधिकारी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार नौगढ़, बांसी, डुमरियागंज, इटवा और शोहरतगढ़ तहसीलों को मॉक एक्सरसाइज में शामिल किया गया। नौगढ़ तहसील के करौंदा मसिना स्थित एक होटल में अग्निकांड की काल्पनिक स्थिति तैयार कर राहत और बचाव कार्यों का अभ्यास कराया गया। इसी तरह बांसी के तिलक इंटर कॉलेज में अग्निकांड की स्थिति को आधार बनाकर संबंधित टीमों की तैयारियां परखी गईं।
डुमरियागंज तहसील में पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भूकंप की स्थिति का अभ्यास कराया गया। इसमें भूकंप के दौरान भवन में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने, घायलों तक तत्काल राहत पहुंचाने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की प्रक्रिया को परखा गया। इटवा में माता प्रसाद इंटर कॉलेज के बड़े भवन से जुड़ी भूकंप की काल्पनिक स्थिति तैयार कर बचाव कार्यों का पूर्वाभ्यास कराया गया।
शोहरतगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अग्निकांड के दौरान अस्पताल में उत्पन्न होने वाली आपदा की स्थिति को आधार बनाया गया। इसमें अस्पताल में मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने, राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वय की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
मॉक एक्सरसाइज के दौरान सभी तहसीलों के उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार मौजूद रहे। जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर से जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर आपदा विशेषज्ञ और उनकी टीम ने सभी तहसीलों में चल रहे पूर्वाभ्यास की निगरानी की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तहसीलों की गतिविधियों और बचाव कार्यों की जानकारी ली गई। इस दौरान आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की भूमिका, त्वरित प्रतिक्रिया और राहत-बचाव व्यवस्था को परखा गया।