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Siddharthnagar News: पूजा सामग्री में भी खेल...धूप-दीप कर सकते हैं बीमार

Thu, 25 Sep 2025 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर के दुकान मे रखा हुआ धूप और अगरबत्ती। संवाद
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सिद्धार्थनगर। त्योहार शुरू होते ही एक बार फिर मिलावट के धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। मोटी कमाई के चक्कर में सेहत और आस्था दोनों से खिलावड़ किया जा रहा है। खाद्य सामग्री में मिलावट तो सभी को पता है। लेकिन अब धंधेबाजों ने पूजा की सामग्री को भी नहीं छोड़ा है। मौजूदा समय में न सिर्फ व्रत की खाद्य सामग्री में मिलावटी सामान बाजार में उतारा गया है। बड़ी मात्रा में खराब क्वालिटी की अगरबत्ती और धूप बत्ती भी बेची जा रही है, जिसके धुएं से सुगंध के बजाय दुर्गंध फैल रही है और उसके धुएं से दम घुटने के साथ ही आंख में जलन की भी शिकायत के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में अगर पूजा सामग्री से आपको भी ऐसी समस्या हो रही है तो समझ लें कि वह लोकल और मिलावटी है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे गंभीर समस्या बता रहे हैं। उनका कहना है कि कार्सिनोजेनिक है, जिससे कैंसर तक हो सकता है।
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त्योहार को लेकर एक माह पहले से मिलावट करने वाले धंधेबाज सक्रिय हाे जाते हैं। जो ब्रांडेड तेल, घी और अन्य सामग्री में बड़े पैमाने मिलावट कर बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। आजकल त्योहारों के चलते पूजन सामग्रियों की मांग बढ़ गई है। बाजार में पूजा में प्रयोग होने वाले देसी घी, तेल के छोटे पैक से लेकर बड़े पैक बाजार में उपलब्ध हैं। ब्रांडेड उत्पाद की आड़ में बड़े पैमाने पर मिलावटी घी और नकली तेल खपाए जा रहे हैं।
इसके प्रयोग से आपके घर और पूजा स्थल की हवा खराब हो रही है। इससे निकलने वाले धुएं न तो पर्यावरण के मित्र हैं और न ही आपकी सेहत के लिए फायदेमंद हैं। डॉक्टर इनके संपर्क में बने रहने से कैंसर तक होने की आशंका जता रहे हैं।
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पूजा के तेल में भी मिलावटी : व्रत को देखते हुए पूजा के तेल और घी में भी धंधेबाजों ने बड़ा खेल कर दिया है। पूजा स्थल पर घी और तेल के दीये से देवी-देवता प्रसन्न हो जाएं, लेकिन मिलावट खोर आस्था से खेल रहे हैं। बाजार में जब जानकारी ली गई।
दुकानों को देखा गया तो कई नए ब्रांड उतर गए। बाजार में बड़े पैमाने पर पूजा के तेल और घी खपाए जा रहे हैं। त्योहार के सीजन में मिलावटी पूजा तेल और घी बेचने की बहार है। ब्रांडेड कंपनियों के उत्पाद की तर्ज पर ही लोकल पूजन उत्पाद भी बेच दिए जा रहे हैं। शुद्ध देसी घी के नाम पर मिलावटी वनस्पति घी के 10 से लेकर 100 रुपये तक के पैक बाजार में उपलब्ध हैं। वहीं, शुद्ध तिल के तेल नाम पर मिलावटी तेल भी 200 ग्राम के पैक से लेकर 400 ग्राम और 900 ग्राम के पैक में बाजार में उतारा गया है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इन उत्पादों के रैपर पर देवी-देवताओं की फोटो लगी हुई है, जिसे देखने के बाद ग्राहक भ्रमित हाे जाए रहे हैं।
नगर के एक किराना स्टोर संचालक ने बताया कि त्योहार का इंतजार किया जाता है। क्योंकि इसमें अच्छी कमाई होती है। पहले अगरबत्ती का दो-चार ब्रांड था, लेकिन आज कई ब्रांड बाजार में आ गया है। इसके साथ ही धूप बत्ती का ट्रेंड चल गया है। उसमें भी कई ब्रांड आ रहा है।
पैकेट देखने से आकर्षित हो जाएंगे। ग्राहक भी सस्ता वाला खोजता है। इसलिए न चाहते हुए भी उसी को लाना पड़ता है। बर्डपुर निवासी एक कारोबारी ने बताया कि व्रत का रेडीमेड सामान बहुत आ गया है। कुछ करना न पड़े इसलिए लोग उसे ही खरीदते हैं। लेकिन, उसकी उसके शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। कमोबेश जनपद के हर बाजार का यही हाल है।
धुंआ से बिगड़ जाती है आबाेहवा : पूजा के साथ ही लोगों में घर- घर दीप जलाने की परंपरा है। लोग शुद्ध पूजन सामग्री समझकर इसे घर ले जा रहे हैं। उपयोग करने के बाद इसमें मिलावट का खेल पता चल रहा है। देशी घी एवं तिल के तेल की दीया जलाने पर काला धुआं निकल रहा है। इससे पूजा स्थल पर धुएं की कालिख जमा हो रही है। इसका सेहत पर भी प्रभाव पड़ रहा है। घर की हवा भी खराब हो रही है।
धूप में जले हुए मोबिल का प्रयोग: दुकान करने वालों से जब धूप बत्ती के गंध और अधिक धुआं निकलने के पीछे जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि जो ब्रांड के धूप बत्ती हैं, उसमें अधिक धुंआ नहीं हाेता है। लेकिन, कई सस्ता ब्रांड बाजार में ऐसा आया है, जिसके जलाने के बाद खूब धुंआ हो रहा है। यह कई बार लोगों के आंख पर असर करने के साथ सांस लेने में कठिनाई पैदा कर रहा है। लोग समझ नहीं पाते हैं। छोटे- छोटे उद्योग में यह गड़बड़ी की जा रही है। इसमें गोबर के साथ जला हुआ मोबिल डालते हैं, जिससे जलता भी तेजी से है और धुंआ भी होता है।
घी और मूंगफली के तेल में मिलावट : शहर निवासी दूध कारोबारी हरिराम यादव ने बताया कि घी में सबसे अधिक मिलावटी की जाती है। इसमें बड़ी दुकानों और पैकिंग की बात अलग है। गांव घर में जो घी दे रहे हैं, उसमें डालडा मिलाया जाता है। डालडा के साथ उसे गर्म कर दिया जाता है, क्योंकि दोनों हल्का पीला होता है इसलिए वह मिल जाता है। घी को पहचानने की जरूरत है। असली घी में सेंट होता है और जमता नहीं है जबकि डालडा मिला घी ठंड स्थान पर जम जाता है।
आठ किलो कुट्टू का आटा पकड़ा : व्रत को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार छापा मार रहा है। अबतक 30 से अधिक सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। साथ ही जांच जारी है। इसमें व्रत के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला कुट्टू आटा पकड़ा गया है। आठ किलो आटे में फफूंदी पड़ने के साथ ही गड़बड़ी की आशंका है। इसके लिए सैंपल जांच के लिए भेजा गया है।
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