सिद्धार्थनगर। कड़ाके की ठंड में लोग पुराने चोटों के दर्द से परेशान हैं। मेडिकल कॉलेज के आर्थो विभाग की ओपीडी व फिजियोथेरेपी में इससे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज के आर्थो विभाग की ओपीडी में इस समय प्रतिदिन 70 से 80 मरीज आ रहे हैं। इसमें से जोड़ों में दर्द और पुराने चोटों के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है।
आर्थो विशेषज्ञ डॉ. विमल द्विवेदी ने बताया कि ठंड के मौसम में शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त संचार धीमा हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर पुरानी चोट वाले मरीज व बुजुर्गों की मांसपेशियों और जोड़ों पर पड़ता है। सुबह के समय मांसपेशियां अधिक जकड़ी रहती हैं। इसके कारण चलने-फिरने में कठिनाई होती है।
कई लोगों को सहारे के बिना खड़े होने में भी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि इससे बचने के लिए हाथ-पैर, गर्दन, घुटनों और कमर का हल्का व्यायाम करना चाहिए। इससे मांसपेशियों में लचीलापन आता है और दर्द कम होता है। उन्होंने बताया कि ठंड में शारीरिक गतिविधियां कम हो जाने से समस्या और गंभीर हो जाती है।
लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना, ठंड से बचाव के पर्याप्त उपाय न करना और बिना चिकित्सीय सलाह के दर्द निवारक दवाओं का सेवन करना परेशानी बढ़ा सकता है। दर्द से परेशान लोग गर्म कपड़े पहनें, शरीर को ढक कर रखें और सुबह-शाम हल्की धूप जरूर लें। गुनगुने पानी से स्नान और सिकाई करने से मांसपेशियों की जकड़न में राहत मिलती है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और नियमित स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है। ्