सिद्धार्थनगर। धान खरीद के लिए व्यवस्था में इस बार बड़ा बदलाव किया गया है। सत्यापन के लिए जहां तीन श्रेणी तैयार बना दी गई है। वहीं, इसे डिजिटल क्रॉप सर्वे एप से भी जोड़ दिया गया। इससे असली रकबा और उस पर फसल लगी है या नहीं, इसके बारे में सटीक जानकारी मिल जाएगी। बिना फसल लगाए किसान बिक्री नहीं कर सकेगा। धान और गेंहू खरीद में हुए घोटाले में पड़े पैमाने पर धांधली की गई थी। बिना रकबा और कम रकबे पर भारी मात्रा में तौल करके सरकारी धन के बंदरबांट का मामला सामने आने के बाद दोबारा ऐसा न हो, इसके लिए सत्यापन के नियम को और सख्त बना दिया गया है। वहीं, जनपद को इस बार खरीद के लिए 72 हजार एमटी का लक्ष्य मिला है।
इस धान के सीजन में घोटाला न हो, इसके लिए नियम में बदलाव कर दिया है। इसमें जहां लेखपाल, एसडीएम और बाद में एडीएम को सत्यापन के लिए रकबे के हिसाब से अधिकारी नामित किया है। वहीं, दूसरी ओर डिजिटल व्यवस्था का सहारा लिया जा रहा है। डिजिटल क्रॉप सर्वे को एग्रो स्टे एप से जोड़ दिया गया है। इस एप से जोड़ने के पीछे उद्देश्य है कि तत्काल यह जानकारी मिल जाएगी कि उस रकबे पर धान लगा था या फिर खरीफ से संबंधित दूसरी फसल या फिर खेत परती था।
यह तत्काल पकड़ में आ जाएगा। क्योंकि, फसल के लगने के बाद यही सर्वे ऑनलाइन अपडेट हो जाता है। धान खरीद की तैयारी की बात करें तो 54 क्रय केंद्र बना दिया गया है। इसके साथ ही जनपद को 72 हजार एमटी खरीद का लक्ष्य मिल गया है। कागजी तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। किसानोंं को उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिल सके और बिचौलिया का दखल खत्म हो, इसके लिए कई उपाय किए गए हैं। डिजिटल व्यवस्था के साथ ही ऑनलाइन पंजीकरण, भुगतान को सरल बनाया गया। लेकिन बिचौलियों ने घोटाला करने के लिए बीच का रास्ता निकाल लिया। सिद्धार्थनगर जनपद के साथ ही प्रदेश के कई जनपद में धान खरीद में बड़ा घोटाला सामने आया।
इसमें सत्यापन में गड़बड़ी, बिना रकबा वाले किसान का सैकड़ों क्विंटल धान की बिक्री, कम रकबे या उपज न होने वाले किसानों ने भी सैकड़ों क्विंटल धान बेच दिया। सुनियोजित तरीके से किए गए इस घोटाले की बात बाहर आने के बाद जांच जारी है।
कार्यालय में बैठक मिल जाएगी रिपोर्ट: डिजिटल खसरे के ऑनलाइन होने के बाद किस गाटा में कौन सी फसल कितने क्षेत्र में लगाई गई, इसकी जानकारी राजस्व विभाग और बीमा कंपनियों के अलावा सत्यापन करने वाली टीम को कार्यालय में बैठकर ही मिल जाएगी। इससे खरीद में पारदर्शिता के साथ ही फसल के मुआवजे और बीमा दावे के मामले निपटाने में तेजी आएगी। इसके साथ ही सरकारी जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जों का पता भी आसानी से लग सकेगा। इसके अलावा रजिस्ट्री के दौरान होने वाले फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी।
खेती की नहीं, तौल कर दी सैकड़ों क्विंटल, बेच दी उपज: सरकारी क्रय केंद्र पर घोटाले का मामला जनपद में कई बार पकड़ में आ चुका था। 16 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला पकड़ा जा चुका है। जांच के दायरे में 36 क्रय केंद्र प्रभारी, तत्कालीन पीसीएफ प्रबंधक सहित अन्य लोग दायरे में आए थे।
इसमें कई पर केस और गिरफ्तारी भी हुई। इसमें छह हजार से अधिक किसान जद में आए थे। बिना रकबा, कम रकबा वाले, बिना ढुलाई के भुगतान जैसी बात सामने आ चुकी है। मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से की जिलाधिकारी के पत्राचार किया जा रहा है।