- हेलमेट से दूरी, मौत से नजदीकी, सड़कों पर हावी लापरवाही
- जागरूकता बेअसर, लापरवाही बेलगाम, हर माह 20 लाख का चालान, फिर भी हरकत वही
- 11 माह में 65,959 लोगों ने तोड़े यातायात के नियम, बिना हेलमेट 32 हजार लोगों का काटा चालान
- बिना हेलमेट लगाए बाइक चलाने वालों की हादसे में गई है सबसे ज्यादा जान
सिद्धार्थनगर। सड़क सुरक्षा को लेकर चलाई जा रही जागरूकता मुहिम के बावजूद हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि हर माह 40 से 45 लाख रुपये से अधिक के चालान कटने के बावजूद सड़क पर जान गंवाने वालों की संख्या कम होने की बजाय बढ़ रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार घटनाएं बढ़ी हैं, जो इस बात की गवाही दे रही है कि पुलिस की सतर्कता पर नियम तोड़ने वालों के हौंसले बुलंद हैं। उनकी छोटी से लापरवाही उनकी जान पर भारी पड़ जा रही है, लेकिन इसके बावजूद उनका खिलवाड़ जारी है।
चालान कटने के बावजूद तोड़ रहे नियम
सिद्धार्थनगर जिले में सड़क हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। इसमें बाइक सवारों की संख्या तो चौंकाने वाला है। इसमें उन्हीं लोगों का आंकड़ा सबसे ज्यादा है, जो बाइक चलाने के दौरान हेलमेट नहीं पहने थे। सोमवार को नगर के सबसे व्यस्त दो स्पाट पर नियम तोड़ने वालों की पड़ताल की गई तो कई चौंकाने वाला नजारा सामने आया। अधिकांश युवा बिना हेलमेट और तीन सवारी बैठाकर फर्राटा भरते हुए नजर आए। जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर पुलिस और प्रशासन लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहा है। नवंबर माह यातायात जागरूकता के रूप में मनाया जा रहा है। इसके साथ ही नियम तोड़ने वालों की जगह-जगह चालान की कार्रवाई, पोस्टर कैंपेन, स्कूलों में सेफ्टी वर्कशॉप सब कुछ किया जा रहा है। इसके बावजूद सड़क पर बेपरवाही का आलम कम नहीं हो रहा। पिछले एक माह के आंकड़े बताते हैं कि 40 से 45 लाख रुपये से अधिक का चालान काटा गया, फिर भी लोग नियम तोड़ने से बाज नहीं आ रहे।
आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि बिना हेलमेट पहने 32 हजार से अधिक वाहन चालकों के चालान काटे गए, यानी रोजाना करीब एक हजार से ज्यादा लोग अपनी और दूसरों की जान खतरे में डालकर सड़क पर उतर रहे हैं। ट्रैफिक विभाग के अनुसार जिले में हुई सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें बाइक सवारों की हुईं और इनमें बड़ा हिस्सा उन लोगों का है जिन्होंने हेलमेट नहीं लगाया था। तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाना, मोबाइल पर बात करना हादसों को दावत दे रहा है।
ट्रैफिक विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि सड़कें तभी सुरक्षित होंगी जब लोग नियमों को बोझ नहीं, सुरक्षा उपाय मानकर अपनाएंगे। आंकड़ें साफ संकेत दे रहे हैं कि लापरवाही मौत बनकर पीछा कर रही है। समय रहते नियमों का पालन और हेलमेट व सीट बेल्ट जैसे बेसिक सेफ्टी गियर अपनाना ही जिंदगी बचाने का सबसे कारगर तरीका है।
चार प्रमुख स्पॉट की जमीनी हकीकत
प्रत्येक स्थल पर 10–10 मिनट की गिनती के आधार पर
अशोक मार्ग चौराहा-समय दोपहर 1:40 बजे
10 मिनट में गुजरे वाहन-145
बिना हेलमेट बाइक सवार-70
हेलमेट पहनकर चलने वाले- 40, इसमें तीन सवारी भी शामिल हैं।
हेलमेट हाथ में लेकर या हैंडल पर टांगकर चलने वाले 15 लोग नजर आए।
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साड़ी तिराहा दोपहर 12:54 बजे
10 मिनट में गुजरे वाहन: 124
बिना हेलमेट सवार-57
हेलमेट पहनने वाले- 47
हेलमेट हाथ में लेकर चलने वाले- 20
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एक नजर हादसों पर
17 मार्च 2025 को त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के परसोहिया तिवारी गांव निवासी मो. कैफ (17) घर से बाइक लेकर किसी काम से सिंगारजोत के लिए निकले थे। अभी शाहपुर सिंगारजोत मार्ग पर सफीपुर गांव के पास पहुंचे ही थे कि सामने से आ रहे भूसा लदा ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गए। इसमें उनका सिर फट गया। लोग उन्हें इलाज के लिए बलरामपुर जिले के उतरौला स्थित एक निजी अस्पताल में ले गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अगर कैफ ने हेलमेट पहना होता तो शायद उनकी जान बच जाती
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23 मई को त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के प्रतापुर गांव निवासी विशेश्वर यादव( 35) व भतीजे उमेश यादव का इटवा थाना क्षेत्र के करहिया पुल के पास बरात से लौटते समय ट्रक के चपेट में आ गए। इस दौरान दोनों ने हेलमेट नहीं पहना था। हादसे में चाचा-भतीजे के सिर में लगी गंभीर चोटें मौत का कारण बनी।
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22 नवंबर को इटवा थाना क्षेत्र के गोरया गांव निवासी यार मोहम्मद (67) बाइक से आलू लेने शाहपुर मंडी आ रहे थे। शाहपुर अंबेडकर पार्क के पास सामने से ट्रक को ओवरटेक कर आ रहे बाइक सवार से भिड़ंत हो गई जिसमें यार मोहम्मद के सिर में लगी गंभीर चोट के कारण इलाज के लिए ले जाते समय मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यार मोहम्मद ने हेलमेट नहीं लगाया था।
10 अक्तूबर को त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के उज्जैनियां गांव निवासी राजू चौरसिया (20) डुमरियागंज थाना क्षेत्र के रिश्तेदारी में बाइक से जा रहा था। सामने से कार ने टक्कर मार दी। इसमें उसके सिर में गंभीर चोटें आई।लखनऊ के एक निजी अस्पताल में करीब सवा माह चले इलाज के दौरान राजू चौरसिया ने 22 नवंबर को दम तोड़ दिया। गांव वालों की मानें तो बाइक चलाने के दौरान राजू के हेलमेट नहीं लगाया था।
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वर्ष हादसा घायल मौत
2023 302 151 178
2024 236 134 167
2025 228 145 155
नोट- 2025 में 23 नवंबर तक का आंकड़ा है। इसमें अब तक 65959 वाहनों का चालान हुआ है। इसमें इसमें 32 हजार अकेले बिना हेलमेट लगाए बाइक चलाने वालों का चालान हुआ है। लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये चालान के रूप में काटे गए हैं। इसके साथ ही पुलिस डोर टू डोर जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। स्कूली बच्चों के साथ अन्य को जागरूक कर रही है। जिससे हादसों में कमी लाई जा सके।
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क्या बोले विशेषज्ञ
हेलमेट सिर की सुरक्षा के लिए सबसे प्रभावी कवच है। 70 प्रतिशत से अधिक मौतें सिर की चोटों के कारण होती हैं, जिन्हें हेलमेट पहनकर आसानी से टाला जा सकता है। क्योंकि गंभीर चोट आने से मौत होती है। अगर सिर सुरक्षित रहे तो हादसे का शिकार होने के बाद भी पीड़ित का बचाना मुमकिन रहता है। कई बार सिर में चोट के कारण दिमागी रूप से कमजोर, कोमा में चले जाने जैसी कई प्रकार की परेशानी होती है।
डॉ. आशुतोष शुक्ल, न्यूरो सर्जन
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बोले जिम्मेदार
नियम तोड़ने वाले सिर्फ अपनी नहीं, दूसरे की जान भी जोखिम में डालते हैं। जरूरत सिर्फ अभियान की नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी की है। इसमें सभी को जागरुक होने की जरुरत है। नियमित प्रेरित करने का कार्य किया जा रहा है। अगर पालन करें तो शायद हादसे से बचा जा सकता है और होने वाले हादसों में कमी आएगी।
अमरेश यादव, प्रभारी यातायात
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बोले जिम्मेदार
सड़क हादसों को रोकने के लिए लगातार चेकिंग चलाया जा रहा है। इसमें नियम तोड़ने वालों का चालान किया जा रहा है। इसके साथ ही स्कूल, कॉलेज में जाकर बच्चों को भी यातायात नियम के प्रति जागरुक किया जा रहा है। उन्हें बताया जा है कि अभिभावक और परिवार के सदस्यों को हेमलेट और सीटबेल्ट लगाने के लिए प्रेरित करें। जागरुकता से हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
डॉ. अभिषेक महाजन, पुलिस अधीक्षक