घोसियारी बाजार स्थित दुर्गा मंदिर पर राम कथा के दौरान कार्यक्रम का मंचन करते बच्चे। स्रोत विज
घोसियारी। बांसी तहसील के घोसियारी बाजार स्थित दुर्गा माता मंदिर पर आचार्य धनंजय ने वर्णन करते हुए कहा कि रामचरित मानस साधारण ग्रंथ नहीं इस जीवन का साक्षात दर्पण है। साधारण दर्पण से मनुष्य का बाहरी रूप ही दिखाई देता है। मानस रूपी दर्पण से जीवन का आंतरिक स्वरूप दिखाई देता है। व्यास महाराज ने शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। प्रसंग सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। इस दौरान शिव-पार्वती विवाह की झांकी भी सजाई गई।
शिव विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। इसके बाद माता पार्वती हिमालय के घर अवतरित हुईं।
बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उसकी शादी की चिंता सताने लगी। कहा कि माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया।