सिद्धार्थनगर। बरसात में नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश होते ही सिद्धार्थनगर की नदियों का जलस्तर बढ़ने लगता है। राप्ती, बूढ़ी राप्ती और बानगंगा के उफान का असर नदी किनारे बसे गांवों पर पड़ता है।
पुराने वर्षों में बाढ़ के दौरान कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट चुका है। ऐसे में इस बार भी लगातार बारिश होने पर 50 से अधिक गांवों के लोगों की मुश्किल बढ़ सकती है। ग्रामीणों को सबसे अधिक चिंता आवागमन, राशन और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर रहती है।
बाढ़ के दौरान नदियों का पानी निचले इलाकों में पहुंचने पर गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग जलमग्न हो जाते हैं। कई जगह सड़क पर पानी भरने से आवागमन बंद हो जाता है।
इससे ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल और तहसील मुख्यालय तक पहुंचने में परेशानी होती है। सबसे अधिक दिक्कत गर्भवतियों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को होती है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। पुराने बाढ़ के दौरान नदी किनारे के कई गांवों में लोगों को नाव के सहारे आवागमन करना पड़ा था।