सिद्धार्थनगर। खाने का जायका बढ़ाना हो तो मसालों के तड़के का अहम रोल होता है। भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ ही कई बीमारियों को भी कंट्रोल करते हैं, लेकिन मिलावट का जहर इन्हें दूषित कर रहा है।
आयात से अधिक खरीद और सहालग में खपत बढ़ने से आकर्षक दिखाने और मसालों का वजन बढ़ाने के लिए तरह-तरह की मिलावट हो रही है। बाजार में खुले बिकने वाले पिसे हुए मसालों की जांच में इस बात की पुष्टि हुई है। इनमें हानिकारक रंग मिले हैं जो कई खतरनाक बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
भोजन को स्वादिष्ट बनाने वाले मसाले आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। अनुचित लाभ कमाने के लिए विक्रेता मसालों में कई तरह की मिलावट कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की ओर से नमूने लेकर कराई गई जांच में इसकी पुष्टि हुई है।
बीते एक वर्ष में खाद्य सुरक्षा विभाग को विभिन्न प्रकार के मसालों के 23 नमूनों को जांच के लिए भेजा गया। इसकी जांच रिपोर्ट में दो ही मानक के अनुरूप पा गए जबकि एक सैंपल अनसेफ मिला है जो इस बात की पुष्टि कर रहा है कि मिलावट का खेल हो रहा है। ऐसे में मिलावटखोरों ने हर खाने पीने वाली वस्तुओं में लागत से अधिक मुनाफा कमाने का रास्ता खोज लिया है।
मिलावटखोर इन मसालों में इतनी बारीकी से मिलावट करते हैं कि उसकी पहचान आसान नहीं है। किराना का कारोबार करने वाले अनूप जायसवाल बताया कि मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनिया, काली मिर्च, जीरा, दालचीनी आदि में अत्यधिक मिलावट की जा रही है। मिर्च पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट होती है। बाजार में मिल रहे अरारोट में तो महक होती ही नहीं। उसमें महक हो इसके लिए हींग की खुशबू वाला रसायन मिला दिया जाता है।
सूत्र बताते हैं कि सोया का डंठल और दक्षिण भारत से आने वाली एक घास को जीरा में मिलाने पर उसमें असली जीरा छांटना बेहद मुश्किल होता है। हल्दी का रंग गाढ़ा करने के लिए रासायनिक रंग और चावल का आटा मिलाया जाता है। धनिया पाउडर में लकड़ी की भूसी का अवशेष मिलाया जा रहा है।
मिलावट पर सजा का प्रावधान: मसालों में हानिकारक मिलावट की पुष्टि होने पर सजा का प्रावधान है। खाद्य सुरक्षा विभाग सिविल कोर्ट में प्राथमिकी दर्ज कराता है। ऐसे में मामलों में दोष सिद्ध होने पर सजा हो सकती है जबकि मिलावट के हानिकारक नहीं होने पर जुर्माने का प्रावधान है।
सात महीने में 277 नमूने 19 लाख का लगा हैं अर्थ दंड : एक अप्रैल से 31 अक्तूबर तक 277 नमूने लिए गए हैं। इसमें से 122 की जांच रिपोर्ट आईं हैं। इसमें 88 फेल भी हुए हैं जबकि अभी तक 96 मामले कोर्ट में हैं जबकि एडीएम कोर्ट में 131 पर निर्णय लिया गया है। इसमें 19 लाख 32 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।
वहीं सात महीने में दूध के 24, खोवा के नौ, पनीर के14, मिल्क प्रोडक्ट के 39, मसाले का 23 सहित अन्य प्रोडक्ट के 163 नमूने लिए गए है।