मां वटवासिनी महाकाली मंदिर गालापुर। संवाद
भनवापुर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ऐतिहासिक सिद्ध पीठ वटवासिनी गलापुर स्थान का इतिहास दो हजार साल पुराना है। महाकाली अपने भक्तों की सभी मुरादें पूरी करती हैं।
राजा केसरी सिंह जो कल हंस वंश के थे उनके की ओर अपने पुरोहित जो शाकद्वीपीय ब्राह्मण थे। उनकी ओर से गोंडा जनपद के खोरहस जंगल से महाकाली को मंगाया गया था। जब उनके पुरोहित महाकाली को लेकर आए तो उसे समय वह मदार के पेड़ में स्थापित थीं। पुरोहितों ने संदेश भिजवाया कि महाकाली को लाए हैं।
राजा को विश्वास नहीं हुआ और उनको कहा जहां खड़े हैं, वहीं रख दें। वह राजा के महल का पीछे का हिस्सा था। पुरोहित क्रोध में आ गए और वहीं मूर्ति रख दी। जैसे ही मदार का स्पर्श पृथ्वी से हुआ पृथ्वी फट गई और वह अंदर चला गया। वहां से वट वृक्ष निकला जो आज भी विद्यमान है।
सर्वप्रथम 1999 में जिला प्रशासन की ओर से जब थोड़ा पैसा दिया गया था तो चबूतरा बना था। बाद में 2012 में पूर्व विधायक स्वर्गीय मलिक कमाल यूसुफ ने मुख्य सड़क चौखड़ा में एक गेट बनवाया था। हालांकि, 2010 के दशक में इस पर्यटन स्थल का रूप दिया गया।