सिद्धार्थनगर। ठंड के मौसम में लापरवाही चेहरे के लकवे (फेशियल पैरालिसिस) का कारण बन सकती है। सर्दियों में सिर और कान खुले रखकर बाहर निकलने से चेहरे की नसों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे लकवे की आशंका बढ़ जाती है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सुभाष यादव ने बताया कि बीते छह महीनों में उनके पास करीब 30 से 40 मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में चेहरे के लकवे के मामले अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल रहे हैं। इस बीमारी के प्रमुख कारणों में हर्पीस वायरस का संक्रमण, गंदे पानी का सेवन, अत्यधिक ठंड के संपर्क में आना, कान के पीछे की नसों पर असर या चोट शामिल हैं।
चेहरे के लकवे में मरीज को पलक बंद करने, मुंह खोलने और चेहरे की गतिविधियों में परेशानी होती है। कई मामलों में चेहरे में दर्द और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।
कहा कि ठंड के मौसम में बिना मफलर और गर्म टोपी के बाहर निकलना जोखिम भरा हो सकता है, विशेषकर सुबह और शाम की ठंडी हवाओं में ज्यादा नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि चेहरे के लकवे का इलाज संभव है, बशर्ते समय पर सही उपचार शुरू किया जाए।