सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यशाला का शनिवार को समापन हुआ। इसमें 65 विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने मशरूम की विभिन्न प्रजातियों, उनके पोषण मूल्य, उत्पादन की अनुकूल परिस्थितियों और व्यावसायिक खेती की जानकारी दी।
प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन के माध्यम से स्वरोजगार और उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान, कृषि विज्ञान और गृह विज्ञान विभाग के साथ ट्रेनिंग एवं काउंसिलिंग सेल के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला आयोजित की गई। समापन सत्र में विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. प्रकृति राय ने आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल भी प्रदान करती हैं।
मशरूम की खेती से रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में मिली जानकारी का उपयोग व्यावहारिक जीवन में करने की अपील की।
कार्यशाला संयोजक डॉ. मनोज कुमार ने तीन दिवसीय गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में 65 विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने प्रशिक्षण लिया। तीसरे दिन के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने मशरूम की विभिन्न प्रजातियों, उनके पोषण गुणों और उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारकों की जानकारी दी।
डॉ. किरण गुप्ता ने मशरूम के जैविक सुधार में वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका बताई। डॉ. दीप्ति मिश्रा ने विभिन्न प्रजातियों के पोषण गुणों और मानव स्वास्थ्य में उनके महत्व पर प्रकाश डाला।
डॉ. मो. मुनीम ने मशरूम उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारकों और खेती के दौरान आने वाली समस्याओं की जानकारी दी। वहीं, डॉ. हरि प्रकाश यादव ने व्यावसायिक मशरूम उत्पादन और कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया समझाई।