- ओपीडी से निकलते ही पर्चा पकड़कर निजी मेडिकल स्टोर तक ले जाते हैं संदिग्ध, सस्ती और असरदार दवा का देते हैं झांसा
- किसी ने 800 तो किसी ने 1400 रुपये में खरीदी दवा, दीवार पर सीढ़ी लगाकर मरीजों को पहुंचाने का आरोप
- दवा वितरण केंद्र पर 300 से अधिक प्रकार की दवाएं उपलब्ध होने का दावा, प्राचार्य बोले- निगरानी हो रही है
सिद्धार्थनगर। पेट की परेशानी के इलाज के लिए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज पहुंचे गोनहा निवासी मुकेश को डॉक्टर की लिखी सभी दवाएं दवा वितरण केंद्र पर नहीं मिलीं। मुकेश के अनुसार, दो दवाएं अंदर से मिलीं जबकि तीन दवाएं एक युवक ने दीवार के पास स्थित मेडिकल स्टोर से लाकर दीं। इसके लिए उसे 480 रुपये देने पड़े।
यह पहला या इकलौता मामला नहीं है बल्कि शनिवार को मेडिकल कॉलेज परिसर में पड़ताल के दौरान ओपीडी के बाहर मरीजों से पर्चा लेकर उन्हें दवा दिलाने के बहाने निजी मेडिकल स्टोर तक ले जाने वाले कई लोग नजर आए। आरोप है कि ये लोग मरीजों को अस्पताल में दवा नहीं मिलने या वहां की दवा असरदार नहीं होने की बात कहकर गुमराह करते हैं। इसके बाद सस्ती और असरदार दवा दिलाने या छूट का भरोसा देकर उन्हें बाहर ले जाते हैं और उन्हें मोटा चूना लगाते हैं। पड़ताल के दौरान करीब 10 मरीज अलग-अलग लोगों के साथ दवा लेने बाहर जाते दिखाई दिए।
मेडिकल कॉलेज में पुराने अस्पताल, महिला अस्पताल और नए भवन में ओपीडी संचालित होती है। तीनों स्थानों पर दवा वितरण केंद्र भी बनाए गए हैं। इसके बावजूद मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर तक ले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्वास्थ्य कर्मियों का आरोप है कि कुछ बाहरी लोग मरीजों को पर्चा देखकर अपने झांसे में लेते हैं। उन्हें दवा दिलाने के बहाने बाहर ले जाते हैं और इसके बदले कमीशन लेते हैं।
मरीजों का पर्चा देखकर पूछताछ
पुराने अस्पताल भवन में ओपीडी के आसपास कुछ लोग मरीजों से पर्चा लेकर दवा के बारे में पूछताछ करते दिखे। एक महिला से पर्चा लेने के बाद एक व्यक्ति ने कहा कि लिखी गई दवा यहां नहीं मिलेगी। महिला ने बताया कि डॉक्टर ने दवा मिलने की बात कही है। इसके बाद भी उसे दवा के असर को लेकर भ्रमित करने की कोशिश की गई। महिला बाद में दवा वितरण केंद्र पर चली गई। इसी दौरान एक बुजुर्ग मरीज ओपीडी से बाहर निकले तो एक युवक ने उनका पर्चा लेकर पूछताछ शुरू कर दी। बुजुर्ग जल्दी में थे और उसकी बातों में आ गए। इसके बाद युवक उन्हें बाइक से बाहर मेडिकल स्टोर ले गया। परिसर में इस तरह मरीजों से संपर्क करने वाले कई लोग दिखाई दिए। मेडिकल कॉलेज के एक स्वास्थ्य कर्मी के मुताबिक, मरीजों को बताया जाता है कि अस्पताल की दवा खाने से बीमारी ठीक नहीं होगी। इसके बाद उन्हें अच्छी दवा और छूट दिलाने का भरोसा दिया जाता है। आरोप है कि दवा की कीमत के हिसाब से प्रति पर्चा 100 से 200 रुपये तक कमीशन तय रहता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
दीवार पर सीढ़ी लगाकर चल रहा खेल
मेडिकल कॉलेज परिसर में निजी मेडिकल स्टोर तक मरीजों को पहुंचाने की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। आरोप है कि पहले कार्रवाई के बाद कुछ समय तक यह गतिविधि बंद रही लेकिन अब दोबारा शुरू हो गई है। पड़ताल के दौरान मेडिकल स्टोर के पास दीवार पर सीढ़ियां लगी नजर आईं। आरोप है कि इनका इस्तेमाल मरीजों को बाहर स्थित दुकानों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। जरूरत के मुताबिक सीढ़ियां लगाई जाती हैं और बाद में हटा दी जाती हैं। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी बढ़ने के बाद कुछ लोग बाहर निकलने वाले मरीजों को निशाना बनाते हैं। पर्चा देखने के बाद उन्हें दवा उपलब्ध कराने का भरोसा देकर निजी मेडिकल स्टोर तक ले जाया जाता है।
300 से अधिक प्रकार की दवाएं उपलब्ध होने का दावा
मेडिकल कॉलेज के एक स्वास्थ्य कर्मी के मुताबिक, दवा वितरण केंद्र पर बीपी और शुगर सहित 300 से अधिक प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। मरीजों को सलाह दी गई कि बाहर से दवा खरीदने से पहले अस्पताल के दवा वितरण केंद्र पर जानकारी लें। वहां दवा नहीं मिलने पर जनऔषधि केंद्र में भी पता किया जा सकता है।
बोले मरीज
बहन का मेडिकल कॉलेज में भर्ती करके इलाज करवा रहा था। आज छुट्टी होनी थी। दवा लिखी गई। जब दवा वितरण केंद्र पर पहुंच तो पता चला कि सभी दवाएं नहीं हैं, इसलिए मेडिकल स्टोर पर गया। एक सप्ताह की दवा का 1515 रुपये लग गए। मुफ्त और सस्ता इलाज सोचकर लोग आते हैं लेकिन यहां पर दवा खरीदनी पड़ती हैं।
- अजय, निवासी बर्डपुर
कान में कई दिनों से दर्द था। पहले दवा और ड्रॉप बाजार से ली लेकिन दर्द ठीक नहीं हुआ। यहां इलाज के लिए पहुंचे तो डॉक्टर ने दवा लिखा। एक युवक मिला। कहा कि यहां दवा नहीं है, अगर मिल भी गई तो काम नहीं करेगी। चलो हम दिलवा देते हैं। घर दूर है, इसलिए उसके साथ मेडिकल पर चला गया। 1400 रुपये दवा का लग गया। बताया कि 15 प्रतिशत छूट दी गई है।
- रामसमुझ, निवासी गोल्हौरा
बोले जिम्मेदार
बाहरी लोगों की निगरानी की जाती है। इसके लिए तो लोगों को नामित किया गया है। जो नियमित जांच करते रहते हैं। इसके साथ ही पुलिस भी निगरानी करती है। सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, उससे भी निगरानी की जाती है। अगर कोई ऐसा करते हैं मिलता है तो कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज