पकड़ी बाजार। क्षेत्र के बैलिहवा गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार की रात कथावाचक पं. पुरुषोत्तम दुबे ने कृष्ण और सुदामा की सच्ची मित्रता की कथा सुनाई। उन्होंने कहा गुरुकुल में साथ पढ़े कृष्ण और सुदामा बड़े होकर अलग-अलग जीवन जी रहे थे। कृष्ण राजा बनते हैं जबकि सुदामा गरीबी में जीवन बिताते हैं।
कृष्ण और सुदामा बचपन में साथ में गुरु संदीपनि के आश्रम में पढ़ाई करते थे। पढ़ाई के बाद, कृष्ण राजा बन गए जबकि सुदामा को गरीबी का सामना करना पड़ा। जब उनकी पत्नी ने उन पर बहुत जोर दिया तो सुदामा अपनी गरीबी का बोझ लिए कृष्ण से मिलने द्वारका गए। जब कृष्ण को अपने मित्र के आगमन का समाचार मिला तो वे तुरंत नंगे पैर ही द्वार पर उन्हें लेने गए। सुदामा की दीन-हीन अवस्था देखकर कृष्ण भावुक हो गए और अपने आंसुओं से उनके पैर धोए।
कृष्ण ने सुदामा से पूछा कि वे उनके लिए क्या लाए हैं। सुदामा संकोचवश चावल की पोटली छिपा रहे थे, लेकिन कृष्ण ने खुद ही पोटली ले ली और खुशी-खुशी उसमें से चावल खाए।