- जिले के 1200 विद्यालयों में कार्यवाहक प्रधानाध्यापक संभाल रहे जिम्मेदारी, वेतन वृद्धि की जगी उम्मीद
- कोर्ट के आदेश के बाद पांच साल से लगातार जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों को लाभ मिलने की उम्मीद
सिद्धार्थनगर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में कार्यवाहक प्रधानाध्यापक के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। जिले के करीब 2200 परिषदीय विद्यालयों में लगभग 1200 विद्यालयों का संचालन कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के भरोसे है। ये शिक्षक नियमित प्रधानाध्यापक की तरह विद्यालय का प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य संभाल रहे हैं लेकिन उन्हें अपने मूल पद के अनुरूप ही वेतन मिल रहा है। ऐसे में कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को प्रधानाध्यापक के समान वेतन देने संबंधी कोर्ट के आदेश से लंबे समय से अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
जिले में जिन परिषदीय विद्यालयों में नियमित प्रधानाध्यापक की तैनाती नहीं है, वहां वरिष्ठता के आधार पर शिक्षकों को कार्यवाहक प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। उन्हें शिक्षण कार्य के साथ विद्यालय के प्रशासनिक कामकाज, अभिलेखों के रखरखाव, विभागीय निर्देशों के अनुपालन, शिक्षकों के बीच समन्वय और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। कई विद्यालयों में यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही है।
अतिरिक्त जिम्मेदारी लेकिन वेतन में अंतर
कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को विद्यालय संचालन से जुड़े निर्णय लेने और विभागीय जवाबदेही निभाने के बावजूद नियमित प्रधानाध्यापकों के समान वेतन नहीं मिल रहा है। इससे लंबे समय से अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कोर्ट के आदेश के बाद अब उन्हें वेतन वृद्धि और एरियर का लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, जिले में कितने शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा और किन शर्तों के आधार पर भुगतान किया जाएगा, यह विभागीय दिशा-निर्देशों और पात्रता के निर्धारण के बाद ही स्पष्ट होगा।
शासन से दिशा-निर्देश प्राप्त होने के बाद नियमानुसार पांच साल से लगातार कार्यवाहक प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों को एरियर और वेतन वृद्धि सहित देय सुविधाएं देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- शैलेश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी