दीपावली के लिए मिट्टी के दीये और अन्य सामान तैयार करते बायताल निवासी मोहम्मद हारून। संवाद
- मिट्टी के दीये, खिलौने और बर्तन बनाने में जुटे मोहम्मद हारून
- स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद, परिवार के साथ कर रहे तैयारी
डुमरियागंज। त्योहारों को मजहब के दायरे से अलग रखकर आपसी सद्भाव की मिसाल पेश कर रहे बायताल गांव के शिल्पकार मोहम्मद हारून दिवाली की तैयारियों में जुटे हैं। वे अपने परिवार के साथ मिट्टी के दीये, खिलौने और बर्तन तैयार कर रहे हैं। उनके हाथों से बने दीये दिवाली पर घरों को रोशन करेंगे। उन्हें इस बार मिट्टी के सामान की अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है।
दिवाली नजदीक आते ही मोहम्मद हारून और उनके परिवार ने मिट्टी के सामान बनाने का काम तेज कर दिया है। उन्होंने बताया कि वह हर साल दिवाली से पहले मिट्टी के दीये, खिलौने और बर्तन तैयार करते हैं। इस बार भी उन्होंने पहले से तैयारी शुरू कर दी है, ताकि त्योहार के समय बाजार में मांग के अनुसार सामान उपलब्ध करा सकें।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में चाइनीज सजावटी सामान के चलन के कारण मिट्टी के दीयों और अन्य पारंपरिक वस्तुओं की बिक्री प्रभावित हुई है। कई बार लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था। इससे मिट्टी के सामान बनाने वाले कारीगरों को परेशानी उठानी पड़ती है।
हारून को उम्मीद है कि इस बार लोग चाइनीज वस्तुओं के बजाय स्थानीय कारीगरों के बनाए मिट्टी के उत्पादों को प्राथमिकता देंगे। इससे उनके पारंपरिक कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और मेहनत का उचित मेहनताना भी मिल सकेगा।