- शहर समेत जिलेभर में देर रात तक हुआ मूर्ति विसर्जन, घाटों पर सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
सिद्धार्थनगर। नौ दिन तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद मंगलवार को विजयादशमी पर श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां को विदाई दी। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक मां दुर्गा की मूर्तियों की शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान ‘जय माता दी’ के जयकारों और भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा। जिले के विभिन्न स्थानों पर निर्धारित नदियों, नालों और पोखरों में मूर्तियों का विसर्जन किया गया। कई जगहों पर दशहरा मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। वहीं, शोभायात्राओं के कारण कुछ मार्गों पर जाम की स्थिति भी बनी, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुख्यालय में जमुआर घाट पर मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था की गई थी। शहर के विभिन्न पंडालों से क्रमवार डोले निकाले गए। पुरानी नौगढ़ पुल पर नगर पालिका की ओर से दो क्रेन लगाई गई थीं, जिनकी मदद से मूर्तियों का विसर्जन कराया गया। कुछ श्रद्धालुओं ने घाट से होकर सीधे जमुआर नदी में भी मूर्तियों का विसर्जन किया। मंगलवार शाम से शुरू हुआ सिलसिला बुधवार सुबह तक चलता रहा।
बस्ती-ककरहवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुरानी पुल पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दोनों ओर से आवागमन रोक दिया गया और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। शहर में जाम से बचने के लिए बांसी तिराहा, हाइडिल तिराहा और स्टेशन रोड से विसर्जन स्थल की ओर जाने वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई।
बांसी और इटवा में भोर तक चला विसर्जन
बांसी/इटवा। बांसी कस्बे में मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन मंगलवार शाम चार बजे शुरू हुआ, जो बुधवार सुबह चार बजे तक चलता रहा। सभी मूर्तियां चंगेरा पैलेस, लोहा मंडी, मंगल बाजार और पुरानी कचहरी होते हुए परंपरागत मार्ग से राप्ती नदी पुल तक पहुंचीं। विसर्जन के लिए पुल पर तीन क्रेन लगाई गई थीं। कृत्रिम तालाब में 12 गोताखोरों और एक नाव की व्यवस्था की गई थी। नदी और आसपास के क्षेत्रों में बैरिकेडिंग भी की गई थी। इस दौरान एसडीएम विश्वमित्र सिंह, सीओ शुभेंदु सिंह, तहसीलदार बृजेश कुमार, कोतवाल महेंद्र प्रताप चतुर्वेदी, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि मो. इदरीश पटवारी समेत अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
इटवा क्षेत्र में अकरारी नाले के त्रिमुहानी घाट, परासी नाले के करहिया पुल, भिलौरी पुल, सीकरी नाले के संग्रामपुर पुल और राप्ती नदी के शाहपुर घाट पर मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इनमें सबसे अधिक भीड़ करहिया पुल के पास परासी नाले पर रही। बढ़नी, बिस्कोहर, बांसी मार्ग और डुमरियागंज मार्ग से शोभायात्राएं जयकारों के बीच विसर्जन स्थल तक पहुंचीं। जय माता दी ग्रुप की मूर्ति के चौराहे पर पहुंचने के बाद विभिन्न दलों के लोगों ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। पूर्व मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की। रगड़गंज, करहिया, लोहटा, मझौवा, टिकुइया, महादेव घूरहू, सेमरी खानकोट, इटवा और कुनगाई समेत कई गांवों की मूर्तियों का विसर्जन देर रात तक सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुआ।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी श्रद्धा के साथ विसर्जित की गईं मूर्तियां
सिद्धार्थनगर। उसका ब्लॉक क्षेत्र के कुआहाटा, चुरिहारी, सुकरौली और मंझरिया समेत कई गांवों में स्थापित मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन बूढ़ी राप्ती नदी के खजुरडाड़ घाट पर किया गया। यहां आयोजित मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और खरीदारी की।
तुलसियापुर प्रतिनिधि के अनुसार, बढ़नी ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में मंगलवार को विभिन्न नदियों और पोखरों में मूर्तियों का विसर्जन किया गया। औदही कलां, रेड़वरिया, मानपुर, अहिरौला, खैरहनिया, तुलसियापुर, चरिहवां, मनिकौरा, केवटलिया, जलापुरवा, सधुवानगर, पिकौरा, मदरहिया, ढेबरुआ, शिवभारी और औरहवा समेत कई गांवों की मूर्तियां एनएच-730 के किनारे पिकौरा के पास घोरही नदी में विसर्जित की गईं। वहीं, सिसवा, पचऊध, झिंगहा और परसा की मूर्तियों का विसर्जन सुरहिया नाले पर हुआ। बूढ़ी राप्ती नदी के सोनबरसा घाट पर झुंगहवां, तिरछहवां, कठेला गर्वी, कठेला शर्की, मैनिहवा, नावडीह और बंदुआरी समेत कई गांवों की मूर्तियां विसर्जित की गईं। रामगढ़ घाट पर बानगंगा नदी में रामगढ़ और बसहिया की मूर्तियों का विसर्जन हुआ।
पकड़ी बाजार प्रतिनिधि के अनुसार, डफरा, धनगढ़िया, रेहरवा, बुढ़नइया, पकड़ी चौराहा, पकड़ी गांव, लालपुर और जम्हिरिया की मूर्तियों का विसर्जन बानगंगा नदी के जम्हिरिया घाट पर किया गया। पिपरी, पिपरी पट्टी, पिपरी बाजार, हड़हवा और कुटवा गांव की मूर्तियां हड़हवा गांव के पास बानगंगा नदी में विसर्जित की गईं। वहीं, मेहनौली, संतोरी और संतोरा की मूर्तियों का विसर्जन बानगंगा नहर में किया गया। डबरा, बभनी और भैसहवा की मूर्तियां बूढ़ी राप्ती नदी के होरिलापुर घाट पर विसर्जित की गईं।
सकरपार प्रतिनिधि के अनुसार, बांसी-पनघटिया बांध स्थित राप्ती नदी के भूतनाथ घाट पर भी मूर्ति विसर्जन हुआ। गोनहाडीह, लमुही, गोनहाताल, मुड़ार खुर्द, गोहर, भरमा, खुटहना, तेजगढ़, भगौतापुर, मदरहना लाला, बंधवाताल, रमवापुर, हसवापार, कदमहवा, कुशलपुर, सेमरा, डड़िया नानकार, हरैया नानकार और देवपुर समेत कई गांवों के श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ मूर्तियां लेकर घाट पहुंचे। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। इसके बाद नम आंखों से मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया गया।