सिद्धार्थनगर। फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की जांच के लिए बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस गिरफ्तार वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जय प्रकाश शुक्ल को लेकर अचल प्रशिक्षण केंद्र पहुंची। चार दिव्यांगता प्रमाणपत्रों से जुड़े अभिलेखों की जांच के लिए कक्ष में आलमारी खुलवाई गई लेकिन उसमें कोई फाइल नहीं मिली। टीम पंजीकरण रजिस्टर अपने साथ ले गई है।
पुलिस टीम ने जय प्रकाश शुक्ल से फाइलों के बारे में पूछताछ की। उसके मुताबिक, दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए फाइल तैयार करने के बाद वह उसे ऑनलाइन कर देता था और इसके बाद फाइल फाड़कर फेंक देता था। जिन चार प्रमाणपत्रों को लेकर दिल्ली पुलिस जांच कर रही है, उनसे संबंधित कोई फाइल भी नहीं मिली।
ऐसे में पुलिस अब रजिस्टर और उपलब्ध दूसरे अभिलेखों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।
दिसंबर 2025 से अब तक के अभिलेखों की फोटो कॉपी कराई जा रही है। वहीं इससे पहले के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। पुलिस ने पंजीकरण रजिस्टर कब्जे में लिया है, जिससे प्रमाणपत्रों के आवेदन और पंजीकरण से जुड़े विवरणों का मिलान किया जा सके। अभिलेखों में अंतर मिलने पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
इससे पहले बुधवार को दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी ने अचल प्रशिक्षण केंद्र में तैनात नोडल अधिकारी से भी काफी देर तक पूछताछ की थी। पुराने और नए कागजात और रजिस्टर देखे गए। इसके बाद कुछ रिपोर्ट तैयार कर टीम अपने साथ ले गई।
गिरफ्तार मलेरिया निरीक्षक से मिली जानकारी के आधार पर नोडल अधिकारी और ईएनटी विभाग से जुड़े कर्मियों से भी पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है।
कान से संबंधित प्रमाणपत्रों की जांच के लिए दिल्ली पुलिस माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग भी पहुंची थी। वहां कान की जांच से जुड़े ऑडियोमेट्रिस्ट से करीब एक घंटे पूछताछ की गई। पुलिस प्रमाणपत्रों में दर्ज जांच रिपोर्ट और संबंधित अभिलेखों का मिलान कर रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच में जो सहयोग मांगा जाएगा, उपलब्ध कराया जाएगा।