औराताल। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में वर्मी कंपोस्ट प्लांट के लिए सरकार की ओर से चयनित किसानों को छह हजार रुपये प्रदान किया गया था, जिससे वर्मी कंपोस्ट प्लांट बनवाए गए थे। विभिन्न गांवों बने 22 प्लांटों में से अधिकांश निष्क्रिय हो चुके हैं। बनगाई में जादू यादव का बना हुआ वर्मी कंपोस्ट प्लांट आज भी कार्यरत है। उन्होंने बताया कि साल में कम से कम छह बार वर्मी कंपोस्ट निकालकर उपयोग में लाया जाता है। उन्होंने बताया कि जैविक खाद के लिए बहुत अधिक परिश्रम की जरूरत नहीं है। कंपोस्ट प्लांट बनाकर उसमें गोबर के साथ केंचुए डालने पड़ते हैं और जैविक खाद एक से दो महीने में तैयार हो जाती है। उन्होंने कहा बनाए हुए प्लांट को ऊपर से ढकने की जरूरत होती है क्योंकि, नेवले केंचुओं को खा लेते हैं। उन्होंने कहा कि घर पर जैविक खेती के द्वारा सब्जियों की पैदावार करते हैं। खेती में भी जैविक कंपोस्ट की ओर से अच्छी पैदावार होती है। इस संबंध में कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर मारकंडेय सिंह सोहना ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट के द्वारा जैविक खेती करने के अनेक फायदे हैं।