जनपद स्थापना दिवस के अवसर पर बर्डपुर स्थित तिराहे पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करत
सिद्धार्थनगर। तथागत गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था, इसी नाम से जनपद का नाम सिद्धार्थनगर पड़ा। महात्मा गौतम बुद्ध का बाल्यकाल का जीवन कपिलवस्तु में व्यतीत हुआ था। गौतम बुद्ध का अस्थि कलश दिल्ली से लाकर कपिलवस्तु म्यूजियम में रखने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
इसके साथ ही जनरल पेपे द्वारा खुदाई के समय स्तूप के अंदर से निकले अवशेष को भी लाने का प्रयास चल रहा है।
ये बातें सांसद जगदंबिका पाल ने अलीगढ़वा में कपिलवस्तु स्तूप पर सोमवार को जिला सृजन के 37वीं वर्षगांठ पर आयोजित जनपद स्थापना दिवस कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि कपिलवस्तु में लाइट एंड साउंड शो के लिए धनराशि आवंटित हो गई है, जिसका कार्य चल रहा है। आने वाले समय में इसका लाभ सभी को मिलेगा। विपश्यना केंद्र का निर्माण कार्य भी चल रहा है। कपिलवस्तु के विकास के लिए 55 एकड़ भूमि उप्र सरकार द्वारा अधिग्रहीत किया गया है। बुद्ध सर्किट के विकास के लिए 250 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि हमारे लिए गर्व की बात है कि राजकुमार सिद्धार्थ ने दुनिया को नई व्यवस्था में लाने के लिए संन्यास लिया। गौतम बुद्ध ने सत्य, अहिंसा और करुणा संदेश दिया है। बुद्ध धर्म का संदेश देने वाले हमारी इसी धरती से गए। आज उनका संदेश दुनिया में शांति स्थापित करने में सहायक है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने जनपद स्थापना के 37वां वर्षगांठ के अवसर पर सभी का स्वागत करते हुए जनपद स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशानुसार जनपद में बहुत से विकास के कार्य हुए है।