सिद्धार्थनगर। जिले के किसानों पर संकट लगातार गहराता जा रहा है। पहले धान के घटिया बीज की सप्लाई और फिर समय से पहले बाली निकलने से हजारों किसानों काे आठ हजार बीघा से अधिक फसल प्रभावित हुई। शासन स्तर पर इसकी जांच होने के बावजूद अब तक किसानों को मुआवजा नहीं मिला है।
अब फैजाबाद से सप्लाई हुए गेहूं के बीज ने भी किसानों को धोखा दे दिया। डेढ़ हजार बीघा से अधिक रकबा प्रभावित है। पौध न निकलने से किसान खेतों में दौड़ लगा रहे हैं तो अधिकारी भी मौके पर जांच में जुटे हैं।
सहकारी समिति से वितरित हुए 200 क्विंटल से अधिक बीज में गड़बड़ी पाई गई है। जमाव 15 प्रतिशत के करीब हुआ है जो ना के बराबर है। ऐसे में जुताई, खाद, बीज पर प्रति बीघा 2500 रुपये और नवंबर की बुवाई में छह क्विंटल प्रति बीघा का अनुमान होता है। ऐसे में 2500 रुपये क्विंटल की दर से नुकसान तो हुआ ही है, वहीं 15 हजार जो उत्पादन होने के बाद किसानों को मिलता वह भी उन्हें नहीं मिल पाएगा।
ऐसे में कुल मिलाकर 17500 रुपये प्रति बीघा के दर से इस बार किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। यदि 1200 बीघा रकबा प्रभावित मानें तो 17500 रुपये लगभग लगभग ढाई करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। किसान संगठनों के अनुसार नुकसान की राशि और भी बढ़ सकती है क्योंकि कई खेतों में दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी। इससे करीब तीन करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है।
गनीमत है कि केवल 200 क्विंटल की आपूर्ति में ही गड़बड़ी हुई है वरना बड़ा रकबा और अधिक किसान प्रभावित होते। प्रभावित किसान विभाग का चक्कर लगाने को विवश हो गए हैं। अधिकारी आंकलन करने के बाद मुआवजा दिलाने की बात कर रहे हैं।
दोहरी चोट : धान में गड़बड़ी, अब गेहूं पर भी संकट: पहले सीतापुर के संडीला की सप्लाई वाले बीच में गड़बड़ी से करीब 8000 बीघा धान में समय से पहले बाली निकल आई थी। किसानों ने शिकायत की तो शासन स्तर से जांच बैठी, लेकिन मुआवजा अभी तक नहीं मिला। अब फैजाबाद सप्लाई वाले गेहूं के बीज में पौध ही नहीं निकली, जिससे किसानों की उम्मीदें चकनाचूर हो गईं। जिले में 1000 बीघा से अधिक रकबा प्रभावित, किसान रोज कृषि विभाग के चक्कर लगा रहे। सहकारी समिति से वितरण हुए 200 कुंतल बीज पर सवाल खड़े, किसानों ने गुणवत्ता की जांच की मांग की। शिकायत करने वाले किसानों ने बताया कि इस बार दोहरी मार पड़ी है। धान की गड़बड़ी का मुआवजा नहीं मिला और अब गेहूं की बुवाई में भी पूरी लागत बर्बाद हो गई। कई किसानों ने कहा कि गेहूं में अंकुर नहीं निकलने से उन्हें दोबारा जुताई करनी पड़ेगी, जिस पर फिर खर्च बढ़ेगा।
इस प्रकार से होती है बीज की जांच: कृषि विशेषज्ञ के अनुसार गेहूं की बीज क्यों नहीं जमाव हुआ है। प्रमाणीकरण से लेकर सप्लाई और बुवाई तक की हिस्ट्री देखी जा रही है। कहां से गड़बड़ी हुई, जिससे जमाव नहीं हुआ है। बीज को अनुसंधान में जांच के लिए भेजा गया है। लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। इस हिसाब से किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, धान की बात करें तो उसने जांच में पाया गया था कि वह वह खजरा था। जांच में इस धान में एक किलो में दो से अधिक नहीं बल्कि एक मुट्ठी भर धान में 20 से 30 गैर प्रजाति के धान का होना सामने आया था।