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Siddharthnagar News: नहीं सुनी दिल की... तेज आवाज ने बढ़ा दी धड़कन की रफ्तार

Sat, 04 Oct 2025 10:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर के तेज आवाज का डीजे। संवाद
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सिद्धार्थनगर। दशहरा के उल्लास मेंं दो दिन विसर्जन में बजने वाले डीजे ने दिल के रोगियों की समस्या बढ़ा दी है। वहीं अभी तक बीमारी से बचे लोगों का भी दिल इस तरह धड़का कि उनका ब्लड प्रेशर ही बढ़ गया। शहर से लेकर गांव तक जिस रास्ते से विसर्जन का जुलूस निकला लोगों का दिल हिल गया। घंटोंं तक गुजरते जुलूस की होड़ में न सिर्फ नींद गुम हुई बल्कि बेचैनी के बीच रात कटी और सुबह डॉक्टर के पास पहुंचने की नौबत आ गई। जांच हुई तो पता चला कि ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ है।
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हद तो तब हो गई जब तेज आवाज बजाने की होड़ में मुकाबला शुरु हुआ। कोई आवाज तेज कर रहा था तो कोई बाईब्रेशन बढ़ा रहा था। इससे न सिर्फ जमीन कांपने लगी बल्कि दिल और दिमाग पर इसका असर पड़ा। समाज के जागरूक लोगाें का कहना था कि पूजा और भजन जरूरी है, यह आस्था का विषय है, लेकिन तेज कानफाड़ू डीजे बजाना गलत है। जो भी काम करें नियंत्रण में करना चाहिए, जिससे सामने वाले का हानि न पहुंचे। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, दिल, दिमाग और कान तीनों के लिए खतरनाक बता रहे हैं।
शहर में आवाज से बढ़ाई दी मुसीबत, बंद करना पड़ा जंगला:शहर और आसपास गांव की मूर्ति का जुलूस शहर हाेकर जमुआर नाले तक पहुंचता है। बृहस्पतिवार शाम सात बजे से नंबर वार डोला उठा और एक- एक करके बढ़ते हुए जमुआर नाला तक पहुंचता रहा। शाम से शुरू हुआ विसर्जन का सिलसिला सुबह के छह बजे तक जारी रहा। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि किसी गति से मूर्ति आगे बढ़ रही थी। इसी बीच डीजे का शोर और बाइब्रेशन के साथ बज रहे साउंड से लग रहा था की दीवार हिल जाएगी। होड़बाजी में गाने बदलने के साथ आवाज बढ़ाते रहे। ऐसे सड़क से सटे मोहल्ले के लोग जुलूस गुजर जाने तक इस इंतजार में थे कि कब गुजरने और आवाज बंद हो फिर सुकून की सांस लें।
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रियाज ने कहा कि उनकी मां बीमार हैं, लेकिन आस्था का विषय है, आवाज पर प्रतिक्रिया देते तो मामले को हिन्दू-मुस्लिम से जोड़ दिया जाता। बजना चाहिए, लेकिन आवाज ऐसी हो, जिससे लोगों को परेशानी न हो। बृहस्पतिवार पूरी रात परेशान होना पड़ा। वहीं, रमेश कुमार और गुड्डू साहनी ने कहा कि रात में सिद्धार्थ तिराहा से गुजर रहे थे। डीजे बाइब्रेशन और लेजर लाइट से दिशा भ्रम हो गया। कुछ देर रात बाइक रोक दी, फिर जब कुछ समझ में आने लगा, इसके बाद आगे बढ़े। लेकिन, इस प्रकार प्रतिक्रिया नहीं दी जा सकती है। प्रतिक्रिया करने पर लोग धर्म विरोधी बता देंगे, लेकिन यह बड़ा संकट है। कमोबेश यह प्रतिक्रिया शहर के अन्य लोगों ने दी।
बस्ती और संतकबीरनगर से आया डीजे: प्रशासन के आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में 1250 मां दुर्गा की मूर्तियां पंजीकृत थीं। इससे इतर भी लोग इतनी ही संख्या में मूर्तियां रखकर पूजा की। नौ दिन शहर से लेकर गांव तक भक्तिमय रहा।
पंडाल पर बजने वाला साउंड ऐसी आवाज में लोगों ने चलाया कि आसपास के लोगों को परेशानी महसूस नहीं हुई। लेकिन, विसर्जन में नंबर एक बनने के लिए पंडाल के अध्यक्षों ने लाखों रुपये डीजे पर खर्च कर दिए। छोटे नहीं बल्कि बड़े पिकअप पर पूरा सेटअप आ रहा था। इसमें हाई आवाज के साथ लेजर लाइट और ब्राइब्रेशन करने वाले वूफर लगे हुए थे। खेसरहा ब्लॉक के बेलौहा बाजार में मूर्ति विसर्जन में बस्ती और संतकबीनगर के मेंहदवल से डीजे आया था। एक 90 हजार तो बस्ती को 1.10 लाख रुपये तक खर्च किया गया। इसमें बात की गई तो पता चला कि पांच से छह माह पहले ही बुक हुआ था। दोनों डीजे में काॅम्प्टीशन होना है कि किसकी आवाज की कितनी तेज और लाइट कितना आधुनिक है। इसी प्रकार जनपद मुख्यालय और बांसी और इटवा डुमरियागंंज में बस्ती से अधिकांश डीजे मंगाया गया था। कोई भी डीजे छह से आठ घंटे का 50 हजार से कम नहीं था।
इसलिए बस्ती से लाते हैं डीजे: साउंड का काम करने वाले रत्नेश ने बताया कि बस्ती में बड़ी संख्या में डीजे है और उनका दूर- दूर तक सट्टा बुक होता है। वहां पर जिस प्रकार और जितनी सुविधा और मॉडल वाला चाहिए, आसानी से मिल जाता है। बस समय से बुकिंग करने की जरूरत है। इसके साथ ही बस्ती के डीजे इसलिए यहां फेमस हो गए कि यहां उतने बड़े लेवल का काम नहीं है।
दूसरे वहां पर शहर का विसर्जन चार से पांच दिन बाद होता है, इसीलिए सभी यहीं पर चले आते हैं। यहां भी कमाई हो जाती है फिर बस्ती शहर के विसर्जन में भी काम कर लेते हैं। वहीं, बांसी और उसका क्षेत्र में संतकबीरनगर से भी डीजे आ जाता है। अंतराल पर विसर्जन की तिथि होने के कारण यहां पर बाहरी वाले धूम मचाते हैं।
ऊपर से लगा देते हैं साउंड: आलम यह है कि पिकअप, ट्राॅली, डीसीएम आदि बड़ी वाहनों के मानक चौड़ाई व ऊंचाई के बाहर तीन से चार फुट का स्टैंड लगाकर सड़क जाम कर देते हैं। यही नहीं प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए इन वाहनों के नंबर प्लेट या तो निकल देते है या मोड़ देते है। इतना ही नीीं उस पर पोस्टर लगाकर ढक देने का भी काम शुरू हो गया है। डीजे पर पर्यावरण संरक्षण कानून और उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद ध्वनि प्रदूषण पर रोक नहीं लग पा रही है। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से ऐसे डीजे संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि क्षेत्र में शांति का माहौल बन सके।
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