सिद्धार्थनगर। जीवन रक्षक दवाएं भी कभी-कभी डोज में गड़बड़ी या पदार्थ की मात्रा अधिक होने से जान ले लेती है। इसी में एक कोल्डि्रफ कफ सिरप है, जिसके सेवन से मध्य प्रदेश और राजस्थान में 14 से अधिक बच्चों की जान चली गई। सिरप में औषधियों के मिलावट की बात सामने आने के बाद उस पर पाबंदी लगा दी गई। हालांकि, जांच में कोई खतरनाक केमिकल नहीं पाए गए हैं। ऐसे में खांसी से बचने के लिए अगर कफ सिरप लेकर पी रहें तो सतर्क हो जाएं। बिना डॉक्टर की सलाह और उन्हें दिखाए सिरप का सेवन करना घातक हो सकता है।
जनपद में रोजाना विभिन्न कंपनियों के लिए 22 हजार से अधिक यानी माह में छह लाख शीशी सिरप की खपत हो रही है। वहीं, शासन स्तर से दिशा-निर्देश जारी होने के बाद जिलाधिकारी ने टीम गठित करके जांच कराने के निर्देश दिए हैं। विभागीय टीम जांच करके सैंपलिंग करेगी। गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
बाजार में एक ही दवाएं कई कंपनी की बिकती हैं और दाम में जमीन-आसमान का फर्क है। मेडिकल लाइन के धंधे से जुड़े लोगों के मुताबिक सब रुपये का खेल है। हूबहू नाम की दवा महंगे ब्रांड की दवा के दाम पर बेचा जाता है और मोटी कमाई की जाती है। दवा में सेटिंग का सब खेल है। दर्जन और पैक के रेट में आने वाली दवाएं, पत्ता और बोतल में बिकती हैं। इसमें दो सही तो एक खराब क्वालिटी वाला भी दे दिया जा रहा है।
दाम और पैक एक ब्रांड वाले से बढि़या दिखेगा, जिससे आप समझ भी नहीं पाएंगे। कुछ इसी प्रकार का खेल कफ सिरप में भी हो रहा है।
शहर के एक मेडिकल शॉप संचालक ने बताया कि मौजूदा समय में बाजार में 25 से अधिक कंपनी के कफ सिरप बिक रहे हैं। किसी का दाम 100 रुपये से कम नहीं है। डिमांड कीजिए माल पहुंच जाता है, बिक्री करके रुपये देना होता है।
उसमें भी 50 प्रतिशत तक मुनाफा है। देने के बाद अगर सही हो गया तो ठीक है नहीं तो ग्राहक दोबारा आता है और बेहतर कहते हुए दूसरा दे दिया जाता है। इसी कमीशन के चक्कर में गड़बड़ माल आ जाता है। फिलहाल, जिस ब्रांड को बंद किया गया है। वह मार्केट में न के बराबर है। दवा की सप्लाई डॉक्टर के लिखने के अनुसार क्षेत्र के हिसाब से होती है। बैन किया गया सिरप यहां पर बहुत नहीं आता है।
बदलते मौसम में बढ़ जाती है कफ सिरफ की बिक्री : डुमरियागंज। नगर के एक बड़े दवा व्यावसायी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी दुकान से थोक के रेट में हर सप्ताह 50 से 70 फाइल (शीशी) कफ सिरफ बिक जाता है। आम दिनों में इसकी बिक्री और मांग घट जाती है, लेकिन बदलते मौसम वायरल फीवर सीजन में कफ सीरफ की डिमांड अधिक रहती है।
दवा व्यवसायी प्रतिबंधित दवा की न करें बिक्री : दवा विक्रेता समिति डुमरियागंज के तहसील अध्यक्ष सत्येंद्रवीर सिंह भाठिया ने बताया कि उनकी तरफ से बार-बार सभी दवा कारोबारियों से सरकार की तरफ से प्रतिबंधित दवा की बिक्री न करने की अपील की जा रही है। साथ ही उनका स्टाॅक मेडिकल स्टोर से हटाने का अनुरोध किया जाता रहा है। कफ सिरप को लेकर जारी सरकार की नई एडवाइजरी का शत-प्रतिशत पालन कराया जाएगा।