- डेढ़ लाख हेक्टेयर गेहूं पर 25 रुपये का सहारा, बढ़ती लागत ने बढ़ाई चिंता
- गेहूं से दलहन-तिलहन तक बढ़ी लागत, एमएसपी पर किसानों की अलग राय
सिद्धार्थनगर। डेढ़ लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के सामने रबी सीजन में एमएसपी बढ़ने के बावजूद लागत का सवाल खड़ा है। गेहूं के समर्थन मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है लेकिन किसानों के मुताबिक खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल, कीटनाशक, खरपतवारनाशक और पोषक तत्वों की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। ऐसे में किसान कहते हैं कि एमएसपी में हुई बढ़ोतरी खेती की बढ़ती लागत के अनुपात में पर्याप्त नहीं है।
जिले में गेहूं के अलावा करीब 10 प्रतिशत क्षेत्र में तिलहन और दलहन की खेती होती है। सरसों, मसूर, चना और जौ किसानों की प्रमुख रबी फसलों में शामिल हैं। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में लागत हर सीजन बढ़ रही है जबकि उपज का उचित मूल्य मिलना अभी भी चुनौती है। एमएसपी घोषित होने के बावजूद बाजार में किसान को वास्तविक बिक्री मूल्य कितना मिलता है, यह भी महत्वपूर्ण है।
इनपुट के दाम बढ़ने से बिगड़ा खेती का हिसाब
- करौता के किसान रामकुमार बताते हैं कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ा है। खरपतवारनाशक और कीटनाशकों के दाम में काफी वृद्धि हुई है। इसके अलावा डीजल की कीमत बढ़ने के साथ सल्फर और अन्य पोषक तत्व भी महंगे हुए हैं। इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ रहा है।
25 रुपये की बढ़ोतरी पर किसानों का सवाल
- टीकर के किसान राजाराम कहते हैं कि जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है तो समर्थन मूल्य में केवल 25 रुपये की वृद्धि किसानों की बढ़ती लागत के अनुपात में पर्याप्त नहीं है। लागत के हिसाब से समर्थन मूल्य में वृद्धि होनी चाहिए। उनका कहना है कि किसानों के हित में एमएसपी बढ़ाने की बात तभी सार्थक होगी, जब बढ़ा हुआ मूल्य बढ़ती लागत के अनुपात में राहत दे।
रबी फसलों का एमएसपी...कितनी बढ़ोतरी
गेहूं : 25 रुपये प्रति क्विंटल
मसूर : 390 रुपये प्रति क्विंटल
सरसों : 413 रुपये प्रति क्विंटल
चना : 83 रुपये प्रति क्विंटल
जौ : 136 रुपये प्रति क्विंटल