सिद्धार्थनगर। सर्दी में फेफड़ों का संक्रमण बढ़ने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, इसकी वजह से सांस, खांसी आदि तमाम प्रकार की समस्या बढ़ गईं हैं। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन रोग विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है और प्रतिदिन फेफड़े से संबंधित 10 से 15 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ने से इसकी चपेट में सबसे अधिक बच्चे और बुजुर्ग हैं। इनमें अस्थमा की शिकायत ज्यादा देखने को मिल रही है।
डॉ. गौरव दुबे ने बताया कि ठंडी हवा से सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। इस कारण सांस लेने में परेशानी होने लगती है। ठंड में विशेष तौर पर अस्थमा और ब्रोंकाइटिस (एक प्रकार का सांस रोग) के मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। ठंड बढ़ने के साथ ब्रोंकाइटिस के मरीजों का कफ बढ़ने लगता है, जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ का अहसास होता है। सर्दी में कम सक्रिय रहने के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में हर किसी को थोड़ी बहुत फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए।
नियमित कराएं शुगर-ब्लड प्रेशर की जांच: सिद्धार्थनगर। सर्दी बढ़ने से शुगर और ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो जाता है। ऐसे में मरीज को ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच कराते रहें। जो दवा ले रहे हैं, उसे बंद न करें। मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव दुबे ने बताया कि ठंड में बीपी बढ़ जाता है। इसके अलावा मेटाबॉलिक एक्टिविटी कम होने से कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आती हैं। ऐसे में बीपी और शुगर की जांच नियमित रूप से करानी चाहिए। संतुलित खानपान के साथ नियमित एक्सरसाइज भी करते रहना चाहिए। इस दौरान लोग ज्यादातर सर्दी-कफ, डायबिटीज, हृदय संबंधी समस्याएं एवं जोड़ों के दर्द की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।