मेडिकल कॉलेज के परिसर में स्थित नशा मुक्ति उपचार केंद्र। संवाद
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सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री के आह्वान पर दो अगस्त से देशभर में 100 दिवसीय ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ शुरू होगा लेकिन पहले जिले की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नशामुक्ति केंद्र में इस समय करीब 1500 मरीज इलाज और काउंसिलिंग करा रहे हैं।
वहीं मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन दो से तीन नए युवा अपने परिजनों के साथ नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए पहुंच रहे हैं। नशे की समस्या अब समाज की गहरी चुनौती बन चुकी है।
करीब दो वर्ष पहले स्थापित नशामुक्ति केंद्र मानसिक रोग विभाग की देखरेख में संचालित हो रहा है। यहां शराब, गांजा, स्मैक, नशीली दवाओं और अन्य मादक पदार्थों की लत से जूझ रहे मरीजों का इलाज किया जाता है। केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सक, काउंसिलिंग और दवा की सुविधा उपलब्ध है। डॉक्टरों के अनुसार कई मरीज नशे के साथ अवसाद, अनिद्रा, तनाव, चिड़चिड़ापन और व्यवहार संबंधी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल दवा नहीं बल्कि लंबी काउंसिलिंग और परिवार का सहयोग भी जरूरी होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गलत संगत, बेरोजगारी, मानसिक तनाव, सोशल मीडिया का प्रभाव और कम समय में सफलता पाने की होड़ युवाओं को नशे की ओर धकेल रही है। शुरुआत अक्सर दोस्तों के साथ शौक के रूप में होती है लेकिन धीरे-धीरे यह लत में बदल जाती है, जिसका सीधा असर पड़ता है।
बढ़ते मामलों को देखते हुए मेडिकल कॉलेज का मानसिक रोग विभाग अब स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने जा रहा है। किशोरों और युवाओं को समय रहते नशे के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी।