जिला उद्योग केंद्र पर बजट को लेकर बैठक करते व्यापारी। संवाद
सिद्धार्थनगर। जिले में लघु उद्योग का मतलब किसी इंडस्ट्रियल एरिया की चिमनी नहीं, बल्कि कस्बे की आटा मिल, गांव की डेयरी यूनिट, छोटी पैकेजिंग मशीन, ट्रांसपोर्ट की पिकअप और बाजार की दुकान है। यही इकाइयां जिले की अर्थव्यवस्था को रोज चलाती हैं। बजट में इन्हीं लघु उद्योगों को लेकर राहत की बातें की गई हैं, लेकिन कई सवाल के जवाब अब तक नहीं मिल पाए हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का आम बजट 2026 पेश किया है। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट है। बजट को पेश करते हुए वित्त मंत्री ने तमाम सेक्टर्स के लिए कई बड़े ऐलान किए। इसमें छोटे और लघु उद्योगों को ग्लोबल चैंपियन बनाने के लिए सरकार ने दस हजार करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड का प्रस्ताव रखा है। इसमें दो हजार करोड़ का टॉप-अप फंड भी शामिल है, जो सूक्ष्म उद्योगों को नई तकनीक और विस्तार में मदद करेगा। सोमवार को जिला उद्योग केंद्र पर पहुंचे कुल्हड़ उद्योग, पत्तल-दोना कारोबारी, लांड्री, सिलाई, गारमेंट्स जैसे लघु उद्योगों से जुड़े लोगों ने बताया कि जिले के अधिकतर छोटे कारोबारी आज भी सीमित पूंजी, महंगे निजी कर्ज और अनिश्चित बाजार के भरोसे काम कर रहे हैं।