औराताल। देसी कालानमक जूही बंगाल आदि धान की प्रजातियां छोड़ दी जाएं तो अन्य किस्म में बालियां आ गई हैं। इस बीच धान की खेती करने वाले किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि, मौसम खुलने के बाद थोड़ी सी धूप निकलने से ही फसलों पर कीड़ों का भी आतंक शुरू हो चुका है।
उन्हीं में से एक है भूरा माहू, जो शुरुआत में ही पकड़ में आने पर आसानी से कंट्रोल हो जाता है, और अगर नजर अंदाज किया तो ये आपकी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मार्कंडेय सिंह ने बताया कि भूरा माहू जिसे ब्राउन प्लांट हूपर बीपीएच के नाम से जाना जाता है। उसे ज्यादातर ‘’भूरा माहू’’ कहते हैं। इसी नाम से ये प्रचलित है। आप देखेंगे कि धान के पौधे में नीचे का जो हिस्सा होता है, जहां से कल्ले निकलते हैं, वहां छोटे-छोटे मक्खी की तरह ये होते हैं, और ये पौधे के रस को चूसते हैं, और पौधे को सुखा देते हैं, जिससे धान की फसल में दाने आने से पहले मैच्योर होने से पहले ही सूख जाती है।
अगर आपके खेत में धान की फसल में भूरा माहू है, तो इसे कंट्रोल करने के लिए तुरंत उपाय करें। सबसे पहले जब धान की रोपाई करते हैं, तो कोशिश करें कि 10 से 15 लाइन के बाद धान के बीच में एक फिट की जगह छोड़ें। इसके अलावा जब भूरा माहू का प्रकोप हो तो खेत में नाइट्रोजन व यूरिया का छिड़काव तेजी से करते हैं। साथ ही खेत से पानी को वेट एंड ड्राई सिस्टम में रखें, मतलब खेत में पानी भरें।
निकालें और तीन-चार दिन के बाद फिर से पानी भरें। अगर फसल में बहुत ज्यादा प्रकोप है और कंट्रोल नहीं हो रहा है, तो फिर कई रासायनिक दवाइयां और कीटनाशकों का इस्तेमाल करें।
इसके लिए आप अपने क्षेत्र के कृषि वैज्ञानिकों, एक्सपर्ट या कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं। सही सलाह लेकर सही दवा की मात्रा के साथ उसका छिड़काव कर सकते हैं।