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Siddharthnagar News: तंग गलियों में बड़े बाजार... आग लगी तो मदद पहुंचाना दुश्वार

Mon, 08 Dec 2025 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर की कपड़े वाली गली। संवाद
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- नगरपालिका सिद्धार्थनगर में पूर्व में लगे हाइड्रेंट सड़क निर्माण की वजह से हो चुके हैं गायब
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- बांसी, डुमरियागंज, शोहरतगढ़ और इटवा नगर पंचायत में भी नहीं हैं हाइडेंट
- गली ऐसी की जहां हमेशा हर समय लगी रही है लोगों की भीड़
- जिले में अक्सर आग लगने की घटनाएं आती हैं सामने
- अगर इन गलियों में आग लगी तो बचना मुश्किल
सिद्धार्थनगर। नगर सहित तहसील मुख्यालयों ठंड का सीजन शुरू होने के बाद से शार्ट-सर्किट और अन्य वजहों से आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है। दो दिन पहले गोवा के एक नाइट क्लब में आग लगने की वजह से 25 लोगों की जान चली गई थी। पिछले हफ्ते गोरखपुर और संतकबीरनगर में भी आग लगने की खबर सामने आई थी। ऐसी घटनाओं से सिद्धार्थनगर में भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। अगर यहां पर आग लग जाती है तो उस पर काबू पाना सबसे बड़ी चुनौती है। फायर ब्रिगेड के पास सारे संसाधन होने के बाद सकरी गलियों में गाड़ी नहीं पहुंच सकती है। जिला मुख्यालय ही नहीं, तहसील मुख्यालय के बाजार में ऐसे हालात हैं कि आग लगने के बाद दमकल की गाडि़यां नहीं पहुंच सकती हैं।
इस दौरान जब आग से बचाव के अन्य विकल्प के रूप में प्रयोग होने वाले हाइड्रेंट के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि नगरपालिका व नगर पंचायतों में फायर सेफ्टी की सबसे जरूरी सुविधा हाइड्रेंट ही नदारद है। नगरपालिका सिद्धार्थनगर में पूर्व में लगे हाइड्रेंट सड़क निर्माण के दौरान गायब हो चुके हैं। बांसी, डुमरियागंज, शोहरतगढ़ और इटवा नगर पंचायतों में तो अब तक हाइड्रेंट की व्यवस्था ही नहीं हो सकी है। भीड़भाड़ व सकरी गलियों वाले इन कस्बों में हालात ऐसे हैं कि आग लगने पर फायर ब्रिगेड की गाडि़यों का मौके पर पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा। घनी बस्तियां, रोज की भीड़ और बिना हाइड्रेंट के बाजार और कस्बों में आग लगने की स्थिति में राहत कार्य भगवान भरोसे है। कई मोहल्लों में गलियां इतनी संकरी हैं कि बाइक भी मुश्किल से निकलती है, ऐसे में दमकल की गाडि़यों का पहुंच पाना नामुमकिन जैसा है। इस दौरान आग काफी तबाही मचा सकती है। वहीं, फायर ब्रिगेड विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि जिले की सभी नगर पंचायत और नगरपालिका में उन स्थानों पर हाइड्रेंट लगाने के लिए पत्राचार किया गया है, जहां से सकरी गलियों में भी आग लगने पर समय से काबू पाया जा सके।
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गलियों में हमेशा रहती है भारी भीड़
जिला मुख्यालय की कपड़े वाली गली और नगरपालिका के पीछे बड़ी आबादी है, जहां दुकान और मकान के साथ गली-मोहल्ले में होटल और लॉन में भी खुले हुए हैं। सोमवार को कपड़े वाली गली में काफी भीड़ देखी गई। अगर एक साथ चार लोग निकल जाएं तो एक दूसरे धक्का जरूर लग जाए। इस गली में 100 से अधिक दुकान हैं। जहां सुबह और शाम को हजारों की भीड़ लगी रहती है। बाजार के साथ ही बड़ी आबादी और बहुमंजिला मकान है। यहां आने के चार रास्ते हैं, लेकिन चारपहिया वाहन लेकर अंदर नहीं जा सकते हैं। इसके अलावा जीजीआई गली है। जहां तीन बड़े स्कूल हैं। इसके अलावा मैरिज हॉल और बड़ी आबादी वहां रहती है, लेकिन मुख्य मार्ग से अंदर जाने का कोई ऐसा रास्ता नहीं है, जहां से दमकल की बड़ी गाड़ी गुजर सके। मोहल्ले के राजेश वर्मा, दुकानदार दिनेश रस्तोगी, राजकुमार ने बताया कि मकान तो पीछे नहीं हो सकते हैं, लेकिन आग से बचाव के लिए नगरपालिका प्रशासन को पानी के लिए एक स्पेशल लाइन की जरूरत है। जिससे अगर आग ले तो पाइप को जोड़कर दमकल विभाग के लोग समय रहते आग पर काबू पा सकें और बड़ी क्षति होने से बच सके।
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इन जगहों पर आग लगी तो बचाव मुश्किल
नगर पंचायत डुमरियागंज महाराजा अग्रेसन वार्ड में कई मॉल और होटल हैं। यहां पर 100 से अधिक दुकानें और बड़ी आबादी रहती है। इससे हमेशा भीड़ रहती है। कुछ दुकानदार तो दुकान का सामान बाहर लगा देते हैं। इसी में होटल, चाय की दुकानें है, जहां पर हमेशा सिलिंडर का प्रयोग होता है। यहां पर चारपहिया वाहन का गुजर पाना मुश्किल है। हाइड्रेंट की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आग लगने पर बड़ा हादसा होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। कमोबेश यही हाल नगर के ही बैदौबा कस्बे की है। जहां 50 से अधिक दुकानें हैं और बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना होता है, लेकिन चारपहिया वाहन नहीं निकल सकते हैं। अगर आग लग जाए तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकती है। आग से बचाव का दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है। डुमरियागंज में आग लगने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। जहां काफी नुकसान हुआ है।
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कस्बे में नहीं है पहुंच पाएंगी दमकल की गाडि़यां
शोहरतगढ़। स्थानीय कस्बे के बाजार काफी घना है। यहां के मार्केट में अगर किसी कारण आग लग जाए तो लोगों को भारी नुकसान हो सकता है। बड़ी संख्या लोगों की जान जा सकती है। मेन रोड छोड़ के शोहरतगढ़ कस्बे में सुबह 9 बजे से लेकर शाम तक बाइक के अलावा कोई बड़ा वाहन नहीं पहुंच सकता है। अगर कस्बे में कोई आगजनी हो जाए तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी का पहुंचना काफी मुश्किल हो जाएगा। शोहरतगढ़ कस्बे में पुलिस पिकेट से लेकर भारत माता तक, गोलघर से सोनारी मुहल्ला व बर्तन गली के रास्तों पर दुकानदार का कब्जा है। जिससे सड़क सकरी हो गई है। प्रतिदिन इन स्थानों पर हजारों की संख्या में लोग खरीदारी करने आते हैं, और लाखों की आबादी भी है। अगर किसी कारण इन स्थानों पर आग लग जाए तो अफरा-तफरी मच सकती है। यहां से निकलने का कोई उचित रास्ता नहीं है। रास्ता है तो वहां भारी भीड़ और सड़कों पर दुकानें लगी रहती हैं। फायर बिग्रेड की गाड़ी भी नहीं पहुंच सकती है।
संकरी गली के चलते बड़ वाहनों का निकलना मुश्किल

इटवा। इटवा कस्बे के मुख्य मार्ग को छोड़कर उससे निकलने वाली गलियों के रास्तों के संकरी होने के चलते बड़े वाहनों का निकलना मुश्किल कार्य है। कस्बे के मुख्य चौराहे से थोड़ी दूरी पर मुख्य मार्ग से निकली बाजार की सबसे प्रमुख गली में सौंदर्य प्रसाधन की सबसे अधिक दुकानें है। जिसके चलते यहां सुबह व शाम महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ रहती है। बिक्री के लिए दुकानों में भी अधिकांश सामान ज्वलनशील ही होते हैं, लेकिन, आग बुझाने के संयंत्र शायद ही किसी दुकान में हो। यही नहीं आग लगने की घटना होने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुंच पाना भी कठिन है। इस संबंध में एसडीएम इटवा कुणाल का कहना है कि यहां बहुत पहले की बनी दुकानें है। इसमें विकल्प बनाया जाएगा कि इस प्रकार की घटनाओं पर काबू पाया जा सके।
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होटल–लॉज के लिए फायर ब्रिगेड के अनिवार्य मानक

फायर एनओसी अनिवार्य – संचालन से पहले अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी।
फायर अलार्म सिस्टम – हर फ्लोर पर सेंसर आधारित अलार्म व सायरन होना चाहिए।
फायर एग्जिट (आपात सीढ़ी) – अलग से इमरजेंसी सीढ़ियोें का होना जरूरी है।
फायर एक्सटिंग्विशर – हर फ्लोर और कॉरिडोर में उपयुक्त मात्रा में एबीसी टाइप व CO₂ एक्सटिंग्विशर लगे होने चाहिए।
हाइड्रेंट लाइन, फायर होज – बड़े होटल में वॉल हाइड्रेंट और पानी की निरंतर आपूर्ति वाली लाइन अनिवार्य।
वाटर स्टोरेज टैंक – छत, ग्राउंड फ्लोर में आग बुझाने लायक पर्याप्त पानी का स्टॉक।
स्मोक डिटेक्टर – सभी कमरों, लॉबी, सीढ़ियों व बेसमेंट में स्मोक डिटेक्शन सिस्टम।
आपात प्रकाश व्यवस्था, आग या बिजली गुल होने पर भी जलने वाला स्पेशल लाइटिंग सिस्टम।
फायर ड्रिल/ट्रेनिंग – स्टाफ को हर 6 महीने में फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग व मॉक ड्रिल।
बिजली लाइन की फिटिंग आईएसआई मानक की वायरिंग, ओवरलोड न होने दें, एमसीबी सिस्टम जरूरी।
आवागमन मार्ग – सीढ़ियां, एंट्री–एग्जिट, लॉबी हमेशा खुली व अनब्लॉक।
क्या बोले व्यापारी
डुमरियागंज नगर में स्थापित फायर स्टेशन दो साल पहले शाहपुर मंडी परिसर में चला गया और उसका नया भवन डुमरियागंज से 5 किलोमीटर दूर सिरसिया में निर्माणाधीन है। नगर में गलियों के सकरी होने के कारण दमकल की गाडि़यों के पहुंचने में दिक्कत होती है। पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत है, जिससे आग लगने पर समय से बुझाया जा सके।

संदीप जायसवाल, व्यवसायी, डुमरियागंज
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डुमरियागंज नगर में पिछले साल आग लगने की तीन घटनाएं हुई थीं। मोबाइल की दुकान में तीन दिन पहले ही आग लगी थी, जिसमें लाखों का नुकसान हुआ है। फायर ब्रिगेड के लोग सूचना देने के बावजूद मौके पर नहीं पहुंचे। अगर दमकल की गाडि़यां समय से आ जाती तो इतना नुकसान न होता। इस समस्या का प्रशासन को त्वरित समाधान करना चाहिए। कस्बे में जहां पर दमकल के वाहन नहीं पहुंच सकते हैं, वहां पर पानी का विकल्प बनाने की जरूरत है। जिससे समय रहते आग पर काबू पाया जा सके।
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अप्पू अग्रहरि, व्यवसायी, डुमरियागंज
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कस्बों में हाइड्रेंट न होना बड़ी समस्या है। गोरखपुर की आग की घटना के बाद हमने सभी नगरपालिका और नगर पंचायतों को पत्र भेजा है। जहां हाइड्रेंट नहीं हैं, वहां तत्काल स्थापना की आवश्यकता है। संकरी गलियों में दमकल नहीं पहुंच पाती, ऐसे में पानी का स्रोत पास में होना बेहद जरूरी है। अगर हाइड्रेंट बन जाते हैं तो आग बुझाने का समय आधा हो जाएगा।

नसीरुद्दीन खान, सहायक अग्नि सम्मान अधिकारी
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