इटवा। राप्ती नदी के उत्तर बसे सैकड़ों गांवों की बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए प्रस्तावित गालापुर बिजली उपकेंद्र पांच वर्ष बाद भी कागजों से आगे नहीं बढ़ सका है। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि उपकेंद्र से लंबी दूरी के कारण क्षेत्र में कम वोल्टेज और बार-बार फॉल्ट की समस्या लगातार बनी हुई है।
वर्तमान में गिरधरपुर, लटेरा, रुद्रौलिया, धोबहा, इटवा वन सहित अनेक गांवों को बैदौलागढ़, डुमरियागंज उपकेंद्र से बिजली मिलती है। दूरी अधिक होने के कारण लाइन के रखरखाव में दिक्कत आती है और खुले तारों पर पेड़ों की डालियां या झाड़ियां आने से अक्सर आपूर्ति बाधित हो जाती है।
समस्या कम करने के लिए शाहपुर फीडर से आपूर्ति को दो हिस्सों में बांटा गया है। एक हिस्से में इटवा-डुमरियागंज मार्ग के पश्चिम के गांव और दूसरे में पूर्व दिशा के गांव शामिल हैं। फॉल्ट या कम वोल्टेज की स्थिति में एक तरफ की आपूर्ति रोककर दूसरी लाइन पर मरम्मत का कार्य किया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को घंटों बिजली से वंचित रहना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गालापुर उपकेंद्र के लिए लोहटा गांव में भूमि का चिह्नांकन भी किया गया था। तत्कालीन एसडीएम ने प्रस्तावित स्थल का कई बार निरीक्षण किया लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
क्षेत्र के उपभोक्ताओं ने मांग की कि गालापुर बिजली उपकेंद्र की योजना को पुनर्जीवित कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए ताकि राप्ती पार के गांवों को निर्बाध और बेहतर बिजली आपूर्ति मिल सके।