भनवापुर। क्षेत्र के नवेल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में तीसरे दिन बृहस्पतिवार को कथा वाचक उत्तम कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मानव के श्रीमद्भागवत कथा के श्रावण मात्र से सभी पाप कट जाते हैं और वह मृत्यु लोक के आवागमन से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।
कथा को आगे बढ़ाते हुए उत्तम कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मानव के मुक्ति का मार्ग श्रीमद्भागवत कथा से ही खुलता है। उन्होंने बताया कि महाभारत की समाप्ति के बाद कलयुग के आगमन की आहट के बीच राजा परीक्षित जंगल शिकार के लिए गए। वहां कलयुग के प्रभाव से परीक्षित का मति भ्रमित हो गई और प्यास से व्याकुल हो कर पानी की तलाश में शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। वहां शमीक ऋषि को ध्यान मग्न देख उन्हें अपशब्द बोलने लगे और पास पड़े मृत सर्प को उनके गले में डालकर चलते बने। नदी पर स्नान करने गए शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि को अन्य बच्चों ने उनके पिता के साथ राजा की ओर से किए गए दुर्व्यवहार की सूचना दी गई। सूचना पर शृंगी ऋषि ने जल लेकर राजा परीक्षित को सात दिनों के अंदर तक्षक सर्प के डसने से मौत का श्राप दे डाला।
सुखदेव की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया। इस दौरान राजा परीक्षित ने सुखदेव से पूछा कि मानव मात्र का उद्देश्य है। इस पर सुखदेव ने कहा कि मानव मात्र का उद्देश्य भगवत भक्ति है। इस दौरान ठाकुर प्रसाद सोनी, विमला सोनी, पवन कुमार सोनी, चंद्रभान सोनी, श्याम सुंदर, चंद्र प्रकाश, अनमोल, रवि, राज आदि मौजूद रहे।