सिद्धार्थनगर। मकर संक्रांति पर इस वर्ष 22 वर्ष बाद एकादशी का दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। संक्रांति और एकादशी एक ही दिन होने से यह पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से अक्षय पुण्यफल प्रदान करने वाला माना जा रहा है।
आचार्य सदाशिव मिश्र ने बताया कि सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर तीन बजकर सात मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सूर्य का उत्तरायण आरंभ होगा, जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है, इसलिए इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाना शास्त्रसम्मत है।
उन्होंने बताया कि महापुण्य काल में किया गया दान, स्नान और जप विशेष फलदायी होता है। उन्होंने कहा कि संक्रांति और एकादशी एक ही दिन होने के कारण चावल दान को लेकर भ्रम की स्थिति न बनाएं।
विष्णु पुराण के अनुसार मकर संक्रांति पर चावल का दान पूरी तरह दोषरहित है। इस दिन तिल, गुड़, चावल, उड़द, खिचड़ी, कंबल और गुड़ के लड्डू दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।म