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Siddharthnagar News: आरोपियों ने बनाई 9.44 करोड़ की संपत्ति

Wed, 19 Nov 2025 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। धान खरीद घोटाले में एसआईटी की कार्रवाई ने पूरे जिले में धान खरीद घोटाले को एक बार फिर चर्चे में ला दिया। करीब 16 करोड़ रुपये से अधिक के धान खरीद घोटाले में फंसे चार आरोपियों की चल-अचल संपत्ति की जांच में अबतक 9.44 करोड़ रुपये की संपत्ति पकड़ में आई है। इसके बाद अब राजस्व वसूली के लिए इन्हें जब्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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एसआईटी ने न्यायालय से नोटिस जारी कराकर आरोपियों की संपत्तियों का विस्तृत सर्वे कराया। जांच टीम ने आरोपियों के नाम पर दर्ज जमीन, मकान, प्लॉट, बैंक खातों, ट्रैक्टर-वाहनों व वाणिज्यिक संपत्तियों तक का बारीकी से परीक्षण किया। जांच में पता चला कि आरोपियों ने कथित घोटाले के दौरान बड़े स्तर पर संपत्ति अर्जित की। इनमें कई संपत्तियां संदिग्ध तरीके से खरीदी गई थीं। इसमें जमीन से लेकर लग्जरी वाहनों तक की हुई माप-तौल हुई।
सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में रिपोर्ट में शहर व कस्बाई इलाकों में बने मकान, बाजार इलाके की चौराहे स्थित दुकानों के साथ दो-तीन महंगे वाहनों को जांच के दायरे में लाकर मूल्यांकन किया गया। इन सभी का कुल मूल्यांकन लगभग 9.44 करोड़ रुपये निकला है।
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पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, धान खरीद घोटाले में गलत भुगतान और अन्य के संबंध में जनपद सिद्धार्थनगर में कुल नौ केस दर्ज किए गए हैं। डीआईजी बस्ती की ओर से गठित टीम के प्रभारी सुजीत राय, क्षेत्राधिकारी बांसी द्वारा विवेचना की जा रही है। वहीं सुजीत कुमार राय क्षेत्राधिकारी बांसी के नेतृत्व में गठित एसआईटी टीम ने पंजीकृत अभियोगों में से छह केस की विवेचना पूरी की जा चुकी है। तीन अभियोग में विवेचना आंशिक रूप से की जा रही है।
विवेचना के क्रम में पहले चरण में आरोपी राकेश दत्त त्रिपाठी पकड़ी थाना उसका बाजार, प्रियंका त्रिपाठी पत्नी राकेश दत्त त्रिपाठी निवासी पकड़ी थाना उसका बाजार, मयंकमणि त्रिपाठी निवासी बुढ़ऊ थाना त्रिलोकपुर अमित कुमार चौधरी (पूर्व पीसीएफ प्रबंधक) निवासी समरधीरा थाना पुरंदरपुर जनपद महराजगंज के विरूद्ध प्राप्त जानकारी के आधार पर इनकी चल-अचल संपत्ति (अनुमानित बाजारी कीमत करीब 9 करोड़ 44 लाख 20 हजार रुपये) जांच में आंकी गई है।
ऐसे खुला बड़ा खेल : जांच टीम के मुताबिक धान खरीद केंद्रों पर फर्जी खरीद, तौल-माप में हेराफेरी, फर्जी बिल-वाउचर और किसानों के नाम पर काल्पनिक भुगतान जैसी कई गड़बड़ियां पकड़ी गई थीं। इसके बाद मामला सामने आते ही डीआईजी स्तर की एसआईटी ने जांच शुरू की थी।
जिले में दहशत का माहौल : अब 9.44 करोड़ की संपत्ति जब्त होने की तैयारी के बाद पूरे जिले में चर्चा है कि यह धान खरीद घोटाले का अब तक का सबसे बड़ा एक्शन होगा। कई घोटाले से जुड़े लोग भूमिगत हो चुके हैं और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई को लेकर संशय में हैं।
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