- रतन सेन डिग्री कॉलेज में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हुआ कार्यक्रम
- वक्ताओं ने इतिहास से सबक लेकर सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने का किया आह्वान
बांसी। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को रतन सेन डिग्री कॉलेज में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संतोष कुमार सिंह ने की। वक्ताओं ने भारत विभाजन की परिस्थितियों, उसकी त्रासदी और उसके दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए नई पीढ़ी को इतिहास से सीख लेने का संदेश दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दया शंकर ने भारत विभाजन की तत्कालीन परिस्थितियों और उसके ऐतिहासिक कारणों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान देशवासियों को अनेक कठिनाइयों और पीड़ाओं का सामना करना पड़ा। इस त्रासदी को याद करने का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से परिचित कराना है।
मुख्य वक्ता डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने विभाजन के दूरगामी प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी हमें इतिहास से सीख लेने और समाज में एकता, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने भावी पीढ़ी को विभाजनकारी तत्वों से सतर्क रहने का आह्वान किया और अखंड भारत की कल्पना को राष्ट्र की एकता एवं अखंडता से जोड़कर देखा।
डॉ. आलोक दुबे ने नागरिकों के दायित्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मजबूत राष्ट्र के लिए प्रत्येक नागरिक का जिम्मेदार होना जरूरी है। रविरेश सिंह ने विभाजन के दौरान हुए बलिदानों को याद करते हुए उन लोगों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की, जिन्होंने विस्थापन और कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि विभाजन विभीषिका को याद करने का उद्देश्य किसी कटुता को बढ़ाना नहीं बल्कि इतिहास से सीख लेकर सामाजिक समरसता, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है।