सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में नए सत्र में भी बीएड पाठ्यक्रम शुरू नहीं हो पाएगा। छह वर्ष पहले खुले विश्वविद्यालय ने तीन वर्ष पहले बीएड की कक्षाएं संचालित करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन अब तक एनसीटीई का पैनल निरीक्षण करने नहीं आया है। इस कारण छात्र-छात्राओं को असुविधा हो रही है और उन्हें अधिक शुल्क जमा करके पढ़ाई करनी पड़ रही है।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित छह जिले के 25 महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां बीएड कक्षाएं संचालित हो रही है। जिले के रतनसेन डिग्री कॉलेज बांसी, शिवपति पीजी कॉलेज शोहरतगढ़ एवं एचआरपीजी कॉलेज संतकबीरनगर में बीएड की कक्षाएं संचालित होती है, जबकि अन्य 22 स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में बीएड की पढ़ाई होती है। इन महाविद्यालयों में परीक्षा संचालित करने का कार्य विश्वविद्यालय प्रशासन करता है, लेकिन विश्वविद्यालय परिसर में ही बीएड कक्षाएं संचालित करने की अनुमति नहीं मिली है।बीएड की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में 54 हजार रुपये शुल्क जमा करना पड़ता है, जबकि विश्वविद्यालय में कक्षाएं शुरू हों तो वे 10-12 हजार रुपये में ही पढ़ाई कर सकते हैं।
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में बीएड की कक्षाएं संचालित करने के लिए एनसीटीई में आवेदन किया गया है। इस मामले में कई बार अनुस्मारक पत्र भेजे गए हैं, लेकिन एनसीटीई के पैनल नहीं आने के कारण बीएड पाठ्यक्रम शुरू नहीं हो पाया है। यदि अनुमति प्राप्त होती है तो कक्षाएं संचालित की जाएंगी।
-अमरेंद्र कुमार सिंह, कुलसचिव