सिद्धार्थनगर। जन्म के एक माह बाद बेटा बीमार हुआ तो इलाज के खर्च से बचने के लिए पति ने छोड़ दिया। पत्नी बार-बार घर में दाखिल होने के लिए परेशान है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। मामला इटवा थाना क्षेत्र के मेहदानी गांव का है। रविवार को पत्नी ने महिला थाने पहुंचकर नई किरण सुनवाई में फरियाद लगाई। मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला थाना प्रभारी ने पति के गृह जनपद बलरामपुर की पुलिस से वार्ता कर उसे थाने में पेश करने को कहा।
रविवार को महिला थाने में आयोजित नई किरण सुनवाई में कुल 23 मामले आए। इसमें सिर्फ एक का ही निस्तारण हो पाया।
इटवा थाना क्षेत्र के मेहदानी गांव से आई नीलम ने उत्पीड़न की व्यथा सुनाई तो पुलिस भी सकते में आ गई। महिला ने बताया कि शादी लगभग दस वर्ष पूर्व बलरामपुर के पचपेड़वा थाना क्षेत्र के लालभरिया गांव निवासी कमलेश से हुई थी। आरोप लगाया कि छह माह पूर्व उसे एक बेटा हुआ था, जो कुछ दिन बाद बीमार हो गया। इसके बाद पति ने मार-पीटकर उसे घर से निकाल दिया। दोबारा घर आने पर जान से मारने की धमकी दे रहा है। बच्चे का इलाज यहां कराया गया, लेकिन वह ठीक नहीं हुआ। डॉक्टरों ने बीमारी गंभीर बताकर लखनऊ के पीजीआई में ऑपरेशन करने के लिए कहा है।
पिता गरीब हैं, किसी तरह मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अब बेटे का इलाज कैसे कराएं। मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला थानाध्यक्ष सुमन त्रिपाठी ने तत्काल संबंधित थाने से बात किया और आरोपी पति को सोमवार को पेश करने की बात कही। नई किरण सुनवाई में महुुलानी की रामू का विवाद निस्तारित हुआ। एक मामला निरस्त हुआ, नौ मामले में एक ही पक्ष पहुंचा। 11 मामलों में दोनों पक्ष प्रस्तुत हुए, लेकिन सुलह नहीं हो पाया। सात मामलों कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। इस दौरान एसआई संगीता विश्वकर्मा, विनयकांत मिश्र, चंद्रप्रकाश लाल श्रीवास्तव, सुषमा श्रीवास्तव, कांस्टेबल सेफाली और रुक्मणि आदि मौजूद रहे।