यूपी बोर्ड परीक्षा में मेरिट में स्थान बनाने वाले मेधावियों को सोशल मीडिया से नहीं हैं नाता
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका है। जिले से अधिकतर छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। जिले में इस बार हाईस्कूल में 92.49 प्रतिशत व इंटर में 90.28 प्रतिशत छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की हैं। इससे इस बार प्रदेश में हाईस्कूल को 15 वा व इंटर को चौथा स्थान प्राप्त हुआ हैं। जबकि पिछले इंटर में पास करने वाले छात्रों के आधार पर जिला 31 वे स्थान पर था।
सबसे खास बात यह है शहर की मेरिट में जगह पाने वाले मेधावियों का सोशल मीडिया से नाता नहीं रहा। रील बनाना या सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड करना पसंद नहीं है। कई का तो सोशल मीडिया पर अकाउंट भी नहीं है। इनका कहना है कि इस समय का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए किया है। मेधावियों का माने तो सोशल मीडिया से समय का बर्बादी होता है। खास बात यह हैं कि जहां लड़कियां अपने आपकाे सोशल मीडिया से जोड़ रही हैं। वहीं इस वर्ष के मेधावियों ने सोशल मीडिया पर अकाउंट तो दूर मोबाइल फोन को छुआ तक नहीं। छात्राओं का माने तो पढ़ने वालों के लिए किताबों में पर्याप्त जानकारी मिल जाती हैं। पढ़ने के लिए सोशल मीडिया की जरूरत नहीं पड़ती हैं।
सोशल मीडिया के लिए समय ही नहीं
पांच घंटे की स्कूल स्कूल की पढ़ाई के बाद दोपहर होमवर्क पूरा करने में बीत जाती थी। शाम को नोट्स तैयार करने पड़ते थे, जबकि रात को नींद आने तक कोर्स का रिवीजन करते थे। सोशल मीडिया के लिए समय ही नहीं मिला। सेना में अफसर बनना चाहती हूं।
-ज्योति वर्मा, इंटरमीडिएट में 92 प्रतिशत
मोबाइल से दूरी, किताबों से दोस्ती
कॉलेज में शिक्षकों ने हाईस्कूल में आते ही समझा दिया था कि कॅरिअर बनाना है तो सबसे पहले मोबाइल से दूरी बनाओ और किताबों से दोस्ती करों। कई बार सहेलियों ने पिछड़ी मानसिकता वाला कहा, लेकिन मैं जानती थी कि क्या सही है।
-वंदना प्रजापति, इंटरमीडिएट में 94 प्रतिशत
लाइक-कमेंट का लगा चस्का बुरा
डॉक्टर बनने की चाह है। जानती हूं अगर सोशल मीडिया के लाइक, शेयर और कमेंट का चस्का लग गया तो ये चाह कभी पूरी नहीं हो पाएगी। सोशल मीडिया चलाते समय बेचैनी रहेगी कि किसने क्या कमेंट किया। इसलिए इनसे दूर रहना ही बेहतर लगा।
-मरियम, इंटरमीडिएट में 91 प्रतिशत
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मेरे पास तो मोबाइल ही नहीं है
सोशल मीडिया चलाना तो दूर मेरे पास तो मोबाइल भी नहीं है। सिर्फ किताबें पढ़ना पसंद करती हूं। स्कूल, घर के काम से जो समय मिलता है, उसमें विषयों का रिवीजन करती हूं। चूंकि नोट्स बनाने होते हैं तो समय ही नहीं बचता। इस सफलता से उम्मीद बंधी हैं।
-स्नेहा चौरसिया, इंटरमीडिएट में 90 प्रतिशत