जिले में 100 वर्षों पुराने 100 वृक्षों का चयन
चयनित वृक्षों का पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से खास ख्याल रखा जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। बुद्ध भूमि के ऐतिहासिक, प्राचीन एवं पौराणिक स्थलों और चिह्नों को सहेजने के क्रम में 100 वर्ष से पुराने वृक्षों में 100 वृक्षों का चयन किया गया है। डीएफओ आकाश दीप बधावन ने बताया कि जिले में ऐतिहासिक, पौराणिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व के 100 से ज्यादा हेरिटेज वृक्षों का चयन किया गया है।
उत्तर प्रदेश जैव विविधता बोर्ड तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के स्कॉलर्स ने इनका चयन किया है। इन प्राचीन वृक्षों के पर्याप्त संरक्षण पर बल दिया जाएगा। इन वृक्षों के प्रति सामान्य जनमानस व स्कूली बच्चों और पर्यटकों में उत्सुकता बढ़ेगी। इसके अलावा इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले वृक्षों के संरक्षण के लिए हैरिटेज ट्रीज आफ यूपी नामक कॉफी टेबल बुक में शामिल किया गया है। इससे पर्यटक, वाचक और प्रकृति प्रेमियों को यह वृक्ष सिद्धार्थनगर की समृद्धि पर्यावरणीय परंपराओं से अवगत कराएंगे। एतिहासिक और पौराणिक वृक्षों की तलाश एवं पहचान लखनऊ विश्वविद्यालय वन जीव संस्थान की मुख्य अन्वेषक प्रो. अमिता कन्नौजिया की अगुवाई में वन विभाग की टीम ने अक्टूबर 2020 में किया था। इस टीम में नौगढ़ रेंज के फारेस्टर दिलीप कुमार, फारेस्ट गार्ड शिवानंद, बांसी के विवेक मिश्र, राजकपूर दुबे, गोविंद लाल, जिला विज्ञान क्लब के संयोजक सिद्धार्थ शंकर पांडेय भी शामिल थे।
जिले में 2500 हेक्टेयर वन क्षेत्र है
जिले के संपूर्ण 2.86 लाख हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्रफल की सापेक्ष वन क्षेत्र मात्र 2500 हेक्टेयर है। डीएफओ आकाशदीप बधावन का कहना है कि जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार पौधरोपण कर वन क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। वृक्षों के महत्व को बताकर लोगों को पौधरोपण के प्रति जागरूक किया जाएगा।