सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की सेंट्रल लैब में कैंसर से संबंधित हिस्टोपैथोलॉजी (बायोप्सी) जांच नहीं होने के कारण मरीजों की जेब ढीली हो रही है। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस द्वितीय सत्र की कक्षाएं शुरू होने से पहले ही ये जांचें शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन दो माह बाद भी जांच शुरू नहीं हो सकी है।
संयुक्त जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में समाहित होने के बाद पैथोलॉजी को सेंट्रल लैब नाम दे दिया गया है, लेकिन यहां जांचों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। नियम के मुताबिक एमबीबीएस द्वितीय सत्र शुरू होने से पहले ही यहां हिस्टोपैथोलॉजी जांच शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन कोर्स के शुरू होने के दो माह बाद भी जांच नहीं शुरू हो सकी है। इससे जहां विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं मरीजों को भी परेशान होना पड़ रहा है। सत्र की शुरुआत के बाद भी मशीनों का इंतजार किया जा रहा है, जबकि मशीनों की आपूर्ति के बाद विशेषज्ञ टेक्नीशियनों की आवश्यकता पड़ेगी। हिस्टोपैथॉलोजी जांच में शरीर के किसी के अंग से मांस के टुकड़े की जांच की जाती है। उसकी रिपोर्ट में स्पष्ट होता है कि कैंसर का संक्रमण है या फंगल इंफेक्शन, अल्सर या कोई अन्य संक्रमण है।
हर दिन 100 से अधिक जांचें हिस्टोपैथोलॉजी की
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 1200 से 1300 मरीज पहुंच रहे हैं जिनमें सर्जरी, आर्थो, ईएनटी एवं गायनी ओपीडी से हर दिन 100 से अधिक जांच हिस्टोपैथोलॉजी से संबंधित की जाती हैं। कॉलेज में जांच की सुविधा नहीं होने से मरीजों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। निजी पैथोलॉजी के माध्यम से सैंपल दूसरे शहरों में भेजा जाता है तो 800 से 1000 रुपये खर्च हो जाते हैं।
प्रायोगिक अध्ययन में हो रही असुविधा
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस द्वितीय सत्र में हिस्टोपैथोलॉजी जांच नहीं होने से प्रायोगिक अध्ययन नहीं हो पा रहा है। मार्च में सत्र शुरू हुआ है, लेकिन अब तक किताबों से ही पढ़ाई हो रही है। इसी प्रकार माइक्रो बॉयोलॉजी लैब में कल्चर सैंपल की भी जांच नहीं हो रही है। इस कारण भी मेडिकल छात्र -छात्राओं को परेशानी हो रही है। पैथोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एकता द्विवेदी ने बताया कि मशीन और टेक्नीशियन प्राप्त होते ही जांच शुरू की जाएगी।
एमबीबीएस द्वितीय सत्र में हिस्टोपैथोलॉजी जांच शुरू करने की योजना है, लेकिन मशीन अब तक प्राप्त नहीं हुई है। जांच शुरू करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है।
- डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य