-एप के जरिये तैयार की जा रही है खसरे की रिपोर्ट, दर्ज होगा सही आंकड़ा किसान ने किस रकबे पर लगाई है कौन सी फसल
-बिना रकबे वाले किसान भी बेच देते थे सरकारी आंकड़ों में सैकड़ों क्विंटल धान और गेहूं
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। फसल की खसरा सर्वे में अनियमितता अब पकड़ी जाएगी। साथ ही परती पर फसल और फसल पर दूसरी दिखाने का मामला पकड़ा जाएगा। घर बैठे रिपोर्ट लगाने की प्रक्रिया पर विराम लगेगा। फसल बीमा के मुआवजे में खेल और बिना फसल लगाए सैकड़ों क्विंटल उपज बेचने वाले पकड़े जाएंगे।
खरीद में घोटाला और मुआवजे में गड़बड़ी रोकने के लिए ई- खसरा की व्यवस्था को लागू किया गया है। एप के जरिये हर गाटे का सही सर्वे होगा। फोटो लेते ही पोर्टल पर रकबा और फसल अंकित हो जाएगा। जो सरकारी पोर्टल पर अपडेट हो जाएगा कि किसान की कितनी भूमि पर कौन सी फसल लगी थी। उसकी उपज एवरेज कितना होगा।
इसके बाद धान या गेहूं की तौल में क्षमता से अधिक तौल की तो पकड़े जाएंगे। वहीं, बीमा राशि का भुगतान होने वाली गड़बड़ी रुकेगी। साथ ही सरकार को हर फसल के रकबे के बारे में सही जानकारी होगी, जिससे उत्पादन और कौन रकबा कितना बढ़ा और घटा, इस बारे में सटीक जानकारी होगी। इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। कृषि और राजस्व विभाग के साथ मिलकर सर्वे का कार्य शुरू किया गया है।
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पहले घर बैठे लगा देते थे रिपोर्ट, होती थी गड़बड़ी
सरकारी नियम है कि यह फसल का सर्वे हो, क्राॅप कटिंग हो, जिससे किस रकबे पर कौन सी फसल लगी है, इसकी सही जानकारी हो सके। खसरा सर्वे का काम लेखपालों के जिम्मे था। जिन्हें हर गाटे पर जाकर सर्वे करना है कि किस गाटे पर कौन सी फसल लगी हुई है, या किसका कौन रकबा परती पड़ा है। यह गाटा नंबर के साथ सर्वे करके खसरा पर दर्ज करना रहता है। उसी से जिला, प्रदेश और देश स्तर पर फसल के प्रकार और रकबे का आंकलन किया जाता है। साथ ही नुकसान और मुआवजा भी तय किया जाता है, लेकिन इसमें कई प्रकार की दिक्कतें आने लगीं। घर बैठे लेखपाल रिपोर्ट लगा देते, जहां जो फसल थी ही नहीं, उसका रकबा दिखा दिया। जो कम है उसे अधिक और जो अधिक है उसे कम दिखे दिया। परती पर खेती दिखा दी। इससे रकबे के आंकलन के साथ उपज की जानकारी में दिक्क्त होती थी। इसी का नतीजा रहता था कि पात्र होते हुए भी किसान कुछ योजना और नुकसान के मुआवजा से वंचित हो जाते थे। वहीं, जिनके खेत में 10 क्विंटल उत्पादन का अनुमान है, वह किसान 100 क्विंटल उपज कागज में बेच दे रहा है। इससे बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होती है। इसमें किसान के साथ- साथ सरकारी को भी क्षति होती थी। नए नियम से इस पर लगाम लग जाएगी।
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खरीद में होता था घोटाला
सरकारी क्रय केंद्रों पर तौल के दौरान ऐसे ही किसानों को लालच देकर फंसा लिया जाता था, जिनके रकबे के उत्पादन की क्षमता 10 क्विंटल है, लेकिन वह 100 क्विंटल बेच रहे हैं। इसमें किसानों का नाम और बिचौलियों का माल खपा दिया जाता था, जबकि वास्तविक किसान अपनी उपज बेचने के लिए परेशान रहता था। वहीं, कई बार ऐसा किया जाता था कि किसान की खतौनी लेकर कागजों में तौल और उसके खाते के जरिये भुगतान फिर उसे कुछ राशि दे दी जाती थी। ई- खसरा सर्वे से संदेह होने पर किसानों की खतौनी का नंबर डाला जाएगा। नंबर देते ही उसके पूरे रकबे की फसल और उपज के बारे में सटीक जानकारी मिल जाएगी। इससे चोरी पकड़ी जाएगी और खरीद में होने वाला घोटाला पकड़ा जाएगा। क्योंकि खरीद की रैंडम जांच भी होती है, जिसमें बाद में पकड़े जाएंगे।
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इस प्रकार से एप से हो रहा है सर्वे
ई- खसरा एप कृषि विभाग और राजस्व टीम के मोबाइल में अपलोड है। साथ ही सर्वे करने के बाद में प्रशिक्षित किया गया है। इसमें सर्वे कर्मी संबंधित गांव जाएं। वहां गांव के मैप का रकबा खोलेंगे। इसके बाद गाटा पर पहुंचने पर किसान का नाम डालेंगे। किसान का नाम आने के बाद फसल की फोटो खीचेंगे। इसके बाद वह रकबा कैच करेगा और अपडेट जाएगा। इसमें यह भी व्यवस्था है कि अगर एक किसान एक गाटे पर दो फसल लगाया है तो फोटो खींचते ही दोनों अलग- अलग हो जाएगा। उस पर किसान के खसरे में दर्ज हो जाएगा। डिजिटल क्रॉप कटिंग सर्वे में उत्पादन अपडेट हो जाएगा। किसान के रकबे में लगभग इतना उत्पादन होगा। इससे गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। डिजिटल सर्वे से घर बैठे खेत में बोई गई फसल की रिपोर्ट लगाने की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा। मूल्य समर्थन योजना में उत्पाद की बिक्री के लिए राजस्व से सत्यापन की जरूरत से मुक्ति मिलेगी साथ ही कृषि बीमा, कृषि ऋण आदि में किसानों को सहूलियत मिलेगी।
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इसमें भी सहूलियत मिलेगा
डिजिटल खसरे के ऑनलाइन होने के बाद किस गाटा में कौन सी फसल कितने क्षेत्र में लगाई गई, इसकी जानकारी राजस्व विभाग और बीमा कंपनियों को कार्यालय में बैठकर ही मिल जाएगी। इससे मुआवजे और बीमा दावे के मामले निपटाने में तेजी आएगी। इसके साथ ही सरकारी जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जों का पता भी आसानी से लग सकेगा। इसके अलावा रजिस्ट्री के दौरान होने वाले फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी।
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इतने गांव के रकबे हैं पोर्टल पर दर्ज
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ई-खसरा एप पर 1831 गांव अपडेट हैं। इसमें 869870 गाटा मैप पर अपडेट हैं। इसमें अब तक 93 गांव का सर्वे हो चुका है। आगे सर्वे का काम जारी है, जिसे फसल कटने तक सर्वे किया जाना है।
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खेती की नहीं, तौल कर दी सैकड़ों क्विंटल, बेच दी उपज
सरकारी क्रय केंद्र पर घोटाले का मामला जनपद में कई बार पकड़ में आ चुका था। करीब चार साल पहले डुमरियागंज क्षेत्र में सैकड़ों किसानों के नाम से लाखों को भुगतान कर दिया गया। इसमें कुछ ऐसे लोग थे, जिनके पास नाममात्र जमीन थी। वहीं, कुछ किसान ऐसे थे जिन्होंने फसल लगाई ही नहीं और सैकड़ों क्विंटल उपज बेच दी। इसमें क्रय केंद्र संचालकों पर केस हुआ था। हाल पांच में जिले में अनाज घोटाले का बड़ा मामला सामने आया। धान खरीद में अनियमितता पर कई लोगों पर केस दर्ज हुआ।
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बोले जिम्मेदार
ई- खसरा सर्वे का कार्य शुरू हुआ है। इसमें मौके पर जाकर विभागीय कर्मी मोबाइल एप से सर्वे करने का कार्य कर रहे हैं। इसकी नियमित समीक्षा हो रही है। इसके होने से कई फायदे होंगे। इसे जिले में कितने रकबे पर काैन फसल लगी है। किसका रकबा बढ़ा और कौन कम हुआ आदि के बारे में जानकारी मिलेगी। साथ ही धान और गेूहं की बिक्री के समय में किसानों के उपज के बारे में सही जानकारी मिलेगी। इससे तौल में अनियमितता होने की गुंजाइश नहीं रहेगी।
-अरविंद्र कुमार विश्वकर्मा, डीडी कृषि