जिला जेल से बाहर आए मासूम को मामा, मामी को सौंपा।
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सिद्धार्थनगर। हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मां-बाप के साथ जेल में रहने को मजबूर मासूम साहिल (6) अब ननिहाल में मामा-मामी की छांव में पलेगा। जिगर के टुकड़े को दूर जाते देख अम्मी की भी आंखें भर आई। डीएम के आदेश पर सोमवार को जेल प्रशासन ने अभिभावक के रूप में थाना गोल्हौरा के ग्राम बहुली निवासी मामा मुस्तकीम व मामी साबिरा खातून को सौंपा। जेल से बाहर आते समय साहिल को कैदियों समेत जेल कर्मचारियों ने रूंधे कंठ से विदाई दिया।
साहिल के मां-बाप को जब अदालत ने सजा सुनाई तो उसकी उम्र साढ़े तीन साल की थी। ठुमक-ठुमक कर बैरक में चलने व तोतली भाषा से उसने सभी का दिल जीत लिया था। भेदभाव की भावना से दूर जेल की दिवारों में कैदी उसकी बाल सुलभ अदाओं पर जान छिड़कते थे। बुजुर्ग कैदी उसे दंतकथा सुनाते तो युवा पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान देते रहे। दिन बीतते देर नहीं लगा, देखते-देखते साहिल छह वर्ष का हो गया।
उसके रिहाई के संबंध में डीएम नरेंद्र शंकर पांडेय ने न्यायालय व शासन से पत्राचार किया। मौलिक अधिकार के तहत छह वर्ष के बालक को जेल में नहीं रखा जा सकता, इसको संज्ञान में लेते हुए अभिभावक के रूप में मामा व मामी को सौंपने का निर्देश दिया। डीएम ने चाइल्ड लाइन व बाल कल्याण समिति को निर्देशित किया कि समय-समय पर मासूम के संबंध में जानकारी लेते रहे।
इस दौरान जेल अधीक्षक बीके गौतम, प्रभारी विशेष किशोर पुलिस इकाई विपिन यादव, अध्यक्ष बाल कल्याण महेश पासवान, जिला समन्वयक चाइल्ड लाइन सुनील उपाध्याय, उमा श्रीवास्तव, गायत्री श्रीवास्तव और नागेंद्र राज आदि मौजूद रहे।