सिद्धार्थनगर। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने सहित सात सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षकों-कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारी-शिक्षक समन्वय समिति के आह्वान पर पठन-पाठन ठप कर शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे तो कर्मचारियों ने भी कार्य बहिष्कार किया। मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करते हुए शासन-प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर उनकी अनदेखी हुई तो संघ बड़े आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
धरने को संबोधित करते हुए समन्वय समिति के अध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2005 में पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त करते हुए शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ छलावा किया है। प्रदेश के शिक्षकों-कर्मचारियों को भी केंद्र के समान मकान किराया, परिवहन, संतान शिक्षा भत्ता सहित अन्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।
समिति इन मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रही है, मगर सिर्फ आश्वासन ही मिला है। अब आश्वासन नहीं आदेश चाहिए। उन्होंने सातवें वेतन आयोग की संस्तुति में तय किए गए न्यूनतम वेतनमान को अपर्याप्त बताते हुए इसे 26 हजार रुपये करने पर जोर दिया।
प्रदेश और केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकारें नहीं चेती तो प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में शिक्षक-कर्मचारी इसका जवाब देंगे। समिति के संयोजक अनिल सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार की ओर से घोषित 7वें वेतन आयोग में कर्मचारियों को उम्मीद थी कि पुरानी पेंशन व्यवस्था पुन: दिया जाएगा, लेकिन उस पर कोई राहत नहीं मिली। शिक्षकों-कर्मचारियों का भ्रम टूट गया है अब हम केंद्र और प्रदेश सरकार को चैन से बैठने नहीं देंगे।
मांग की कि वेतन विसंगति को दूर करते हुए सभी को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए। अंत में मांगों से संबंधित ज्ञापन शासन को प्रेषित किया। धरने को डीआर त्रिपाठी, रामऱ्विलास यादव, रामनिवास कुशवाहा, श्रीपति, राजमणि पांडेय, भूपेश शुक्ला, इंद्रजीत, रणजीत, अवधेश यादव, अनिरुद्ध ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर नसीम अहमद, रूपेश सिंह, अभय श्रीवास्तव, चंद्रमणि पांडेय, अरुण सिंह, बृजेश, शिवाकांत, हरवंश, लालजी यादव, मुस्तन शेरुल्लाह, इंद्रसेन सिंह, अब्दुल रऊफ, उमेश, दिलीप, दिनेश सिंह, मोहीउद्दीन, वीरेंद्र, सत्येन्द्र मिश्रा आदि ने संबोधित किया