सिद्धार्थनगर। जिले में 16 करोड़ रुपये से अधिक के धान खरीद घोटाले के मामले में फरार चले रहे 25 हजार रुपये के इनामी क्रय केंद्र प्रभारी नरसिंह चौधरी को एसआईटी ने सोमवार को कस्बे से दबोच लिया। सदर थाना में लाकर पूछताछ करने के बाद न्यायालय रवाना कर दिया। पकड़े गए आरोपी ने तत्कालीन पीसीएफ प्रबंधक की ओर से सवा दो करोड़ रुपये के हेराफेरी किए जाने की बात कबूल की है। इस मामले में अबतक कई क्रय केंद्र प्रभारी जेल जा चुके हैं। 37 क्रय केंद्र प्रभारी जांच की जद में आए थे।
एसआईटी प्रभारी व सीओ शोहरतगढ़ सुजीत कुमार राय ने बताया कि धान खरीद घोटाले की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगी हुईं हैं। सोमवार को सूचना मिली कि घोटाले में शामिल 25 हजार रुपये का इनामी नगर में किसी से मिलने के लिए आया है। सूचना मिलते ही टीम बताई लोकेशन पर पहुंच गई। यहां एक संदिग्ध दिखा।
टीम ने आगे बढ़कर कुछ पूछने की कोशिश की। इस बीच वह भागने लगा। जवानों ने घेराबंदी करके आरोपी को दबोच लिया। पूछताछ में उसने अपनी पहचान अतर्दिया थाना सोनहा जनपद बस्ती निवासी नरसिंह चौधरी के रूप में हुई है। उसपर डीआईजी बस्ती ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
एसआई टीम प्रभारी ने बताया कि पूछताछ में आरोपी ने बताया कि पूर्व पीसीएस प्रबंधक अमित चौधरी ने उसे विश्वास में लेकर पीसीएफ के अकाउंट से करीब दो करोड़ 25 लाख के आसपास उसके अकाउंट में डाले थे। इसकी अलग से जांच की जा रही है।
पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायालय रवाना कर दिया गया। मामले की जांच चल रही है। जो भी जद में आएगा उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा।
यह है धान खरीद घोटाले का पूरा मामला: जिले में 2023-24 में धान खरीद में 16 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला उजागर हुआ था। इस मामले में पीसीएफ क्षेत्रीय प्रबंधक ने जिला प्रबंधक अमित चौधरी व एक अन्य पर घोटाला के मामले में केस दर्ज करवाया था। जांच का दायरा बढ़ा और इसमें 37 क्रय केंद्र प्रभारी जांच की जद में आ गए। इसमें एसआईटी की टीम ने जांच शुरू की।
बैंक खातों के लेनदेन में बड़ी अनियमितता और गलत लोगों को भुगतान करने के सुबूत टीम के हाथ लगे। भुगतान करने वाले किसानों तक जांच की आंच पहुंच गई। जांच के जद में 4200 से अधिक किसान आ गए।
इस मामले मेंं अब तक 10 से अधिक क्रय केंद्र प्रभारियों को जेल भेजा चुका है।
मामले की जांच एसआईटी कर रही है। उधर, जिलाधिकारी ने घोटाले को गंभीरता से लेते हुए आर्थिक अपराध शाखा से जांच के लिए पत्र लिखा था। इसमें धान खरीद घोटाले में डुमरियागंज में एक फर्जी क्रय केंद्र बनाकर धान हड़पने को मुख्य बिंदु बनाते हुए जांच कराने की बात कही।
इसे शासन ने पत्र को संज्ञान में लिया और अनु सचिव मनोज कुमार पांडेय ने संज्ञान में लिया और आर्थिक अपराध शाखा से जांच के लिए डीजीपी को पत्राचार किया। साथ ही समय से जांच के लिए कहा है।