सिद्धार्थनगर। कालानमक चावल असली है या मिलावटी। अब इसकी जांच हो जाएगी। ऐसे में चावल की गुणवत्ता प्रमाणित होगी तो साख और कीमत बढ़ जाएगी। मिलावटी से बदनामी होने के बाद कालानमक चावल की कीमतो में गिरावट हुई तो जिला प्रशासन अलर्ट हुआ है। जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने कालानमक चावल प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक में चावल की गुणवत्ता प्रमाणित करने के लिए संस्था नामित करने के निर्देश दिए हैं।
साल 2018 में ओडीओपी में शामिल हुआ था। उसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार से चावल की कीमत 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया था, लेकिन बिचौलियों ने किसानों से खरीदे हुए धान में मिलावट करके बेच दिया और स्वाद और सुगंध के लिए मशहूर कालानमक चावल की साख गिरने लगी। दो साल पहले तक जिस चावल की कीमत अच्छी थी, वहीं चावल अब 8-1 हजार रुपये क्विंटल बिक रहा है। कालानमक चावल के लिए मिले पीएम अवार्ड की राशि 20 लाख रुपये से कालानमक चावल निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड का भवन बना दिया गया है, अब बोर्ड के माध्यम से इसमें लैब का संचालन किया जाएगा और कालानमक चावल की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ बाजार में मांग बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। लैब बनाने से पहले एजेंसी नामित होगी तो सैंपल की जांच से गुणवत्ता की रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी। अधिकारियों ने संस्था नामित करने का प्रयास तेज कर दिया है।
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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान वाराणसी में भेजा सैंपल
प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान वाराणसी में कालानमक चावल का सैंपल भेजा है। जांच रिपोर्ट में कालानमक चावल के तत्व पता चलेंगे और उसकी तुलना बासमती की गुणवत्ता से की जाएगी ताकि पता चल सके कि ग्रेड-1 के चावल बासमती की अपेक्षा कालानमक चावल कितना बेहतर है? मानक तय होने पर कालानमक चावल की जांच होगी तो उसी मानक को गुणवत्ता का आधार बनाया जाएगा।
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बनी कमेटी और होगा चुनाव
मुख्य विकास अधिकरी जयेंद्र कुमार ने बताया कि बोर्ड के बेहतर संचालन के लिए अस्थायी समिति बनाई गई है। समिति बोर्ड में सदस्य बढ़ाएगी और चुनाव के माध्यम से पदाधिकारी चुने जाएंगे। इसका मकसद किसानों को एक मंच पर लाकर विकास करना है। जिले कृषक उत्पादक संगठनों के अध्यक्ष चुनाव में शामिल होंगे, जिले में 44 कृषक उत्पादक संगठन हैं। समिति में उपनिदेशक कृषि एके विश्वकर्मा,जिला कृषि अधिकारी मो मुजम्मिल, प्रगतिशील किसान श्रीधर पांडेय, अभिषेक एवं सुशीला मिश्रा है। बोर्ड और प्रशासन के माध्यम से वित्तीय प्रबंधन किया जाएगा।
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वापस आ गया था मेरठ से चावल
कालानमक की परंपरागत प्रजाति और शोध से तैयार हुई छोटी डंठल वाली नई प्रजाति के चावल के स्वाद और सुगंध में अंतर है, लेकिन नई प्रजाति के धान और चावल को भी परंपरागत प्रजाति के भाव बेचने के खेल में बाजार बिगड़ गया है। यहीं कारण है कि छह माह पहले एक सरकारी कार्यालय से मेरठ भेजा गया चावल वापस आ गया था। भरोसा इतना कम हो गया कि लखनऊ चवल भेजने के लिए एक अधिकारी ने अपने सामने चावल की कुटाई कराई।
बढ़ गया धान का रकबा
जिला कृषि अधिकारी मो. मुजम्मिल ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले में कालानमक धान का रकबा 16 हजार हेक्टेयर हो गया है, जबकि एक साल पहले तक रकबा 15000 हेक्टेयर था। जिले में 3200 एमटी कालानमक धान का उत्पादन था, जबकि 22, 544 किसान कालानमक धान की खेती कर रहे हैं।
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नियार्त शुरू होने की संभावना
कालानमक चावल की सीएफसी के निदेशक अभिषेक ने बताया कि कालानमक का निर्यात शुरू होने की संभावना है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से पत्राचार किया था। कालानमक चावल को गैर बासमती चावल से अलग विशेष चावल का दर्जा मिलेगा तो निर्यात के लिए एचएसन कोड मिल जाएगा। निर्यात पर रोक नहीं लगी थी तो जिले से 80 टन से अधिक चावल का निर्यात होता था।
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किसानों की बात
निर्यात बंद होने से कालानमक चावल का बाजार मंदा हो गया, जबकि मिलावट ने भी किरकिरी करा दी। कालानमक चावल की कीमत चढ़कर गिर जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। कालानमक चावल की गुणवत्ता प्रमाणित होगी तो बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा।
-इंद्रजीत दुबे, टड़िया बाजार
ओडीओपी में शामिल कालानमक चावल का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित नहीं है, जबकि प्रशासन ने 6500 रुपये क्विंटल धान खरीदने की बातें की थी, लेकिन खरीद हुई नहीं और किसान परेशान है। मैंने तो 8000 से 10000 रुपये क्विंटल चावल बेचा है।
-प्रदीप पांडेय, खेसरहा
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वर्जन
कालानमक चावल के प्रोत्साहन के लिए बोर्ड का दायरा बढ़ाया जा रहा है। किसानों की चयनित समिति के माध्यम से बोर्ड का संचालन और विकास होगा। फिलहाल कालानमक चावल की गुणवत्ता प्रमाणित करने के लिए संस्था नामित करने के निर्देश दिए गए हैं।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी