पांच अधिकारियों की गर्दन फंसी
धान खरीद घोटाला : एसडीएम डुमरियागंज ने डीएम को भेजी रिपोर्ट
जिला प्रबंधक पीसीएफ, जिला सहकारी अधिकारी डुमरियागंज, सहायक विकास अधिकारी सहकारिता भनवापुर, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी डुमरियागंज और विपणन निरीक्षक भनवापुर को ठहराया जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। स्थानीय तहसील में हुए धान खरीद घोटाले में कार्रवाई का सिलसिला शुरू है। पांच अधिकारियों पर अनियमितता किए जाने का आरोपी मानते हुए एसडीएम ने रिपोर्ट तैयार करके डीएम को भेजी है। रिपोर्ट में कई अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है। उनकी रिपोर्ट पर सवाल उठने लगे हैं। कार्रवाई की इस कड़ी में अनियमितता के जिम्मेदारों में जिला प्रबंधक पीसीएफ का उत्तरदायित्व निर्धारित करने की रिपोर्ट के साथ जिला सहकारी अधिकारी तहसील डुमरियागंज, सहायक विकास अधिकारी सहकारिता भनवापुर, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी तहसील डुमरियागंज, विपणन निरीक्षक भनवापुर के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। रिपोर्ट जिलाधिकारी को एसडीएम ने प्रेषित की है। उनका मानना है कि यदि इनके द्वारा निचले स्तर पर सत्यापन, पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण किया गया होता तो ऐसी अनियमितता नहीं हुई होती। एसडीएम की रिपोर्ट पर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि जब एसडीएम की आईडी हैक हुई और घोटाले की पटकथा लिखी गई तब उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। जबकि अगर किसी की आईडी हैक होती है तो तत्काल पता चल जाता है। ऐसे में सत्यापन होता रहा और पता नहीं चला, इसकी भी जांच होनी चाहिए। एसडीएम त्रिभुवन ने बताया कि धान खरीद घोटाले की समस्त धनराशि 78 लाख रुपये मय ब्याज वसूली जा चुकी है। धान क्रय केंद्र प्रभारी और तथाकथित किसान के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। गिरफ्तारी और गैंगस्टर लगाए जाने के लिए संबंधित थाने को निर्देशित किया जा चुका है। तथाकथित किसान हरिश्याम के कोटेदार की दुकान निरस्त की जा चुकी है। समस्त धान क्रय केंद्रों को सील किया जा चुका है। कंप्यूटर ऑपरेटर अमित त्रिपाठी भूलेख की सेवा समाप्त करने की रिपोर्ट प्रेषित की जा चुकी है। विकास मिश्रा की गिरफ्तारी हो चुकी है और रमेश गुप्ता की तलाश की जा रही है। सरकारी धन जिन खातों में अंतरित हुए हैं, उन्हें सीज किया जा चुका है। जांच में पूरी तरह पारदर्शिता बरती गई है।