भारतभारी। डुमरियागंज क्षेत्र के कमसार गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार की रात कथा वाचक आचार्य मदन शास्त्री ने ज्ञान वैराग्य भक्ति की कथा का श्रवण कराया। कथा वाचक ने बताया बिना कथा सत्संग के ज्ञान वैराग्य भक्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती है। कथा में आगे धुंधकारी-गोकर्ण की अद्भुत कथा का भी श्रवण कराया।
कथा के दौरान बताया कि भागवत कथा श्रवण करने से घर के पितृदोष की शांति मिलती है। उन्होंने बताया कि आत्म देव पं. महाराज ने पुत्र के लिए जंगल में जाकर मरने का निश्चय किया संत की कृपा से फल प्राप्ति से पुत्र की प्राप्ति हुई।
गोकर्ण महान ज्ञानी हुए धुंधकारी महा दुष्ट हुआ धुंधकारी मरने के बाद प्रेत बन कर सबको दुख देने लगा। भागवत कथा श्रवण करा करके धुंधकारी प्रेत योनि से मुक्ति कराई। धुंधकारी के लिए भगवान के धाम से विमान आया विमान में बैठ करके धुंधकारी की भागवत की महिमा गाते हुए जय-जयकार करते हुए भगवान के धाम में पहुंचे। उन्होंने बताया कि भागवत कथा से प्रेत बाधा की शांति होती है। पितृ दोष की शांति होती है।