डुमरियागंज। हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में शुक्रवार को चेहल्लुम पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। इस मौके पर शिया बाहुल्य गांव हल्लौर में अलम, अमारी, ताबूत व जुलजुनाह का जुलूस निकालकर अकीदतमंदों ने मातम किया। जुलूस देर शाम कर्बला पर मातम के बीच समाप्त हुआ। इस दौरान छोटे-बड़े सैकड़ों ताजियों को अकीदतमंदों ने दफन कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश किया।
हजरत इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों के चेहल्लुम को लेकर नौवीं यानि गुरुवार रात में हल्लौर स्थित विभिन्न इमामबाड़ों व लोगों के घरों पर छोटे-बड़े सैकड़ों ताजिए रखे गए। जहां पर अकीदतमंदों ने सारी रात मर्सिया-मजलिस के बीच मातम कर इमाम हुसैन को याद किया। शुक्रवार की सुबह नमाज अदा कर इमामबाड़ा वफ्फ शाह आलमगीर से अंजुमन फरोग मातम व अंजुमन गुलदस्ता मातम के जानिब से अलम, ताबूत व अमारी का जुलूस निकाला गया। जुलूस में इमाम हुसैन की सवारी जुलजनाह की शबीह भी साथ में चल रही थी। अकीदतमंद बोसा लेकर अपने परिवार व मुल्क के सलामती की दुआएं मांग रहे थे।
जुलूस पूरे गांव से होते हुएहल्लौर मुख्य चौराहे पर पहुंचा। यहां अकीदतमंदों ने कमा व जंजीर का मातम किया। इस मौके पर फजले हैदर, कायम रजा, डॉ. कायनात, शकील गुड्डू, मंजर मास्टर, हानी हल्लौरी, रिंकू, रेनू, सब्लू, आरजू, फरहान आदि ने नौहे पढ़े। मातम के बाद जुलूस फिर बड़े इमामबाड़े पर आकर मजलिस की शक्ल में बदल गया। मजलिस में मौलाना जमाल हैदर ने कहा कि मोहम्मद का भरा घर कर्बला के मैदान में लुट गया था। रसूल के बेटे व उनके घर वालों को यजीद ने कत्ल कर उनकी लाशों को क्षतिग्रस्त कर दिया था।
यजीदी फौज को छह माह के प्यासे दुध मुहें अली असगर पर भी तरस नहीं आया। इमाम हुसैन व उनके 72 शहीदों की शहादत की दास्तां सुनकर अकीदतमंदों की आंखें से आंसू बहने लगे। मजलिस को मौलाना अली अब्बास, अजीम हैदर, मौलाना महफूज, मौलाना कल्बे अब्बास आदि ने भी संबोधित किया। इस दौरान नायाब हल्लौरी, हसन जमाल, जलाल, सज्जाद, सावन हल्लौरी, बब्लू कामयाब, अजीम हैदर, आलेरजा माले, आमिर, सब्लू, असकरी शमीम रिजवी, मोहम्मद इमरान, काजिम मेंहदी, हाशिम रिजवी, जामिन रिजवी, बब्लू रिजवी, मोहम्मद मेंहदी, पप्पू रिजवी, नजमुल हसन, मंजू रिजवी, ताकीब रिजवी आदि मौजूद रहे।