नगर स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र के परिसर में अनुसूचित जाति शिक्षक कर्मचारी संघ की ओर से संत रविदास की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत पंचशील व बुद्ध वंदना के बाद भगवान बुद्ध के क्षमायाचना से हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संतकुमार व संचालन रामबक्श गौतम ने किया। मुख्य अतिथि सपा नेता रामकुमार यादव चिनकू ने कहा कि एक समय था, जब दलितों को मंदिर में नहीं जाने दिया जाता था।
उस दौरान संत रविदास जी ने अपने कठिन संघर्षों के बलबूते इस धारणा को समाप्त किया। उन्होंने जाति-पाति की खाई को समाप्त कर एक संदेश दिया कि सभी मानव एक समान हैं। एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए कोई ऊंचा या नीचा नहीं है।
रामबक्स गौतम ने कहा कि संत जी का जन्म एक दलित परिवार में हुआ था, जो गौतम बुद्ध के आदर्शों पर चलकर पूरे समाज व देश को संदेश दिया। संतकुमार ने कहा कि संत रविदास ने अपने दर्शन से भारत के लाखों लोगों को नई उर्जा दी।
अंधविश्वासों व असमानता से पीड़ित लोगों का उत्थान किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष गरीबदास गौतम, डा.राजेश गौतम, अनिल गौतम, राममिलन, राजेश मणि, संत्य नारायण, पुन्नवासी, छेदीलाल, बिंदू प्रसाद, शिवशंकर, राजकुमार, सुखपाल, हरिलाल, भागीरथी, रामजी शिवा गौतम, रामलखन, मंगरे आदि मौजूद रहे।
मित्र संघ के पदाधिकारियों ने नगर स्थित मित्रसंघ कार्यालय पर सोमवार को संत रविदास की जयंती मनाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष सनी श्रीवास्तव ने की।
कार्यक्रम में चंद्रशेखर त्रिपाठी, मनोज श्रीवास्तव, राकेश, बताशा बाबा, मीना देवी, रामपाल, कल्लू, परसुराम दूवे आदि मौजूद रहे। क्षेत्र के जमौता-जमौती गांव में हुए कार्यक्रम में ग्राम प्रधान ने दीप प्रज्जवलित किया। त्रिशरण पंचशील डा.शीश कुमार बौद्धाचार्य ने कराया। संचालन मनोज सिद्धार्थ ने किया।
आबिद अली सेठ ने कहा कि संत रविदास ने जीवन के काल में मौजूदा प्रवेश को देखते हुए समतामूलक समाज की स्थापना व आपसी भाईचारा पर बल दिया। इस दौरान रामसुरेश, पलटन, महदेव, मंगरेराम कन्नौजिया, इंतजार, मो. नासिर, राजू, रंजीत आदि मौजूद रहे।
डॉ. अम्बेडकर पार्क शाहपुर में उत्तर प्रदेश डॉ. भीमराव अम्बेडकर सेवा समिति ने जयंती मलाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बसपा विधानसभा प्रभारी सैय्यदा खातून रहीं। अध्यक्षता अदालत प्रसाद बौद्ध व संचालन महामंत्री सूर्यबली ने किया। उत्तम प्रसाद गौतम, रामप्रकाश गौतम, अनिल कुमार, बच्चाराम बौद्ध, लवकुश गौतम, जगराम बौद्ध, झिनकन, रामनाथ, सालिकराम आदि मौजूद रहे।