गेहूं खरीद में पारदर्शिता बरतने की सख्त हिदायतों के बावजूद मनमानी हावी है। एक क्रय केंद्र पर किसानों का गेहूं तो खरीद लिया गया, मगर भुगतान न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी कटौती कर की गई है। प्रति क्विंटल 70-75 रुपये काटा गया है। मामला बर्डपुर के क्षेत्रीय सहकारी समिति का है। किसानों की शिकायत के बाद हरकत में आए जिला प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं।
सूखा प्रभावित जिले में गेहूं खरीद को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए शासन ने क्रय केंद्रों पर बिना किसी कटौती के खरीद का निर्देश दिया था। गुणवत्ता और नमी की नाम पर भी किसी तरह की कटौती नहीं की जानी थी। यानि किसानों को प्रति क्विंटल गेहूं का 1525 रुपये के न्यनूतम समर्थन मूल्य का ही भुगतान होना था।
इससे इतर क्षेत्रीय सहकारी समिति बर्डपुर पर किसानों को 75 रुपये कटौती कर भुगतान दिया गया है। नंदूपुर के किसान बाबूराम यादव ने क्रय केंद्र पर 36 क्विंटल 50 किग्रा गेहूं बेचा। इसके बदले उसके खाते में कुल मूल्य 55662 रुपये की बजाए 52923 रुपये दिए गए।
इसी तरह शंकरपुर के किसान शोएब अहमद को 22 क्विंटल 71 किग्रा गेहूं बेचने पर 34635 रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि कुल मूल्य 34635 रुपये हुआ था। बर्डपुर नं.12 के किसान रामगोपाल को 40 क्विंटल गेहूं के बदले महज 58000 रुपये ही दिए गए हैं।
तीन हजार रुपये किस मद में कटौती की गई है, यह भी नहीं बताया जा रहा। बार-बार समितियों के चक्कर लगाने के बाद किसानों ने मंगलवार को जिलाधिकारी के दर पर दस्तक दी। प्रभारी डीएम अखिलेश तिवारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी आरएमओ को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।