साइबर के जानकारों के मुताबिक, झारखंड का गिरोह एटीएम कार्ड, डेविट कार्ड एक्सपायर होने, नया कार्ड बनाने, बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने, लाॅटरी लगने, कारोबार दिलाने के नाम पर ठगी करता है। इनकी बोली बिहार से मिली-जुली हिंदी और मीठी होती है। इससे सामने वाले को लगता है कि कोई अपने बीच का है और अधिकारी है। इसके बाद वह आसानी से आपको को अपने जाल में फंसा लेगा।
खड़ी बोली और आवाज में भारीपन तो मेवात का गैंग
मेवात वाला गैंग ओएलएक्स, फेसबुक आईडी को हैक कर लेना, वीडियो कॉलिंग करना। रोजगार का लालच देना, ई-केवाईसी, बैंक लोन, नई तकनीक से होने वाली ठगी करता है। यह गैंग दिल्ली, मुरादाबाद, बरेली जैसी बोली बोलता है। ये लोग संयमित भाषा में बोलेंगे तब भी लगेगा कि आपसे नाराज होकर बोल रहे हैं। अगर कॉल करने वाला तेज आवाज में बात कर रहा है। उसके मुंह से अक्सर ''तुम'' निकल रहा है तो समझ लीजिए कि यह राजस्थान के मेवात का गिरोह है।
इस गिरोह से की रिकवरी
बांसी कस्बे के एक युवक को फेसबुक पर गेम के जरिए इस गैंग ने फंसा लिया। गेम जीतने पर रुपये का लालच दिया। एक बार इसके पास रुपये भेजा भी। जब फंसा लिया तो पांच-पांच हजार रुपये करके कई बार में डेढ़ लाख रुपये की ठगी कर ली। जानकारी हुई तो तत्काल साइबर सेल में शिकायत की। युवक के बताने के हिसाब से टीम ने काम शुरू किया और एक माह के भीतर पूरी रकम खाते में वापस कराने में कामयाब रही।
खेसरहा क्षेत्र के एक युवक को कंपनी में नौकरी दिलाने के लिए कॉल आई। बात करने पर उसे ऑफर दिया कि इतने रुपये प्रति माह की नौकरी पक्की। सब कागजात भेज दो। उसने कागजात भेजा, फिर रुपये की डिमांड करने लगे। तीन बार में उसने 27 हजार रुपये बैंक खाते में भेज दिया।
तीन दिन इंतजार के बाद जब कुछ नहीं हुआ तो उसे लगा कि ठगी का शिकार हो गया। इसके बाद उसने साइबर सेल के नंबर पर शिकायत की। जांच शुरू हुई तो पता चला कि मेवात का गैंग है। इसके बाद टीम ने छानबीन करके पूरे 27 हजार रुपये उसके बैंक खाते में वापस करा दिए।
बोले एक्सपर्ट
सिद्धार्थनगर साइबर एक्सपर्ट अतुल कुमार चौबे ने कहा कि अभी तक जामताड़ा का गिरोह साइबर ठगी करता था। लेकिन, अब मेवात राजस्थान का गैंग लोगों को शिकार बना रहा है। ठगी के मामले की जांच शुरू हुई तो इस गिरोह के बारे में जानकारी हुई। लेकिन, दोनों राज्यों के गैंग की भाषा में अंतर है। अगर कोई ठगी का शिकार हो रहा है तो तत्काल सूचना दें। इसके साथ ही यह ध्यान दें कि कॉल करने वाला किस प्रकार से बात कर रहा था और उसकी आवाज कैसी थी। यह जानकारी मिलने से जांच में आसानी होती है। साइबर ठगी से बचने के लिए जागरुकता जरूरी है।
बोले अधिकारी
पुलिस अधीक्षक अभिषेक कुमार अग्रवाल ने कहा कि साइबर ठगी से लोग बच सकें, इसके लिए पुलिस टीम लोगों को जागरूक कर रही है। विद्यालय में जाकर और अन्य माध्यम से साइबर अपराध के बारे में जागरूक किया जा रहा है। साइबर अपराध के मामले में साइबर सेल की टीम ठगी के रुपये वापस भी करवा रही है।