सिद्धार्थनगर। मौसम का मिजाज शुक्रवार को बदल गया। रुक-रुक कर बारिश और हवाओं के कारण दिन में ही रोशनी कम हो गई, जिससे लोगों को वाहनों की लाइट ऑन करके चलना पड़ा। बारिश और हवाओं के कारण सभी फसलों को नुकसान हुआ है। गेंहू, तिलहनी और दलहनी फसलों को बारिश ने क्षति पहुंचाई है। गेंहू की खड़ी फसलें हवाओं के कारण जमीन पर गिर गई।
होली के ठीक पहले मौसम ने करवट ली है। शुक्रवार को आसमान में बादल छा गए और दोपहर के समय भी अंधेरे जैसी स्थिति हो गई। बारिश के कारण उड़ती धूल से लोगों को निजात तो मिल गई पर किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। बारिश से गेंहू, सरसों, मटर, आलू, अरहर की फसल को काफी नुकसान हुआ है। बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फसलों के नुकसान से किसान सदमें में हैं। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह का कहना है कि बारिश और हवाओं के कारण सर्वाधिक नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है।
इटवा। रुक रुक कर हुई बरसात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। चिंता बारिश से अधिक तेज हवाओं से है। गेहूं की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। फसल गिरने से गेहूं की बालियों के दानों के हल्के होने की संभावना है। ग्राम कलेनिया, नबेलवा, चौखड़ा, महतिनिया, अकोलिहा, लटेरा कलवारी, बेनीपुर, जगजीवनपुर, पकड़ी सहित सैकड़ों गांवों के किसानों की गेहूं की फसल प्रभावित हुई है।
डुमरियागंज। खेतों में लहलहाते तैयार गेहूं की फसल को देखकर किसान जहां अपने अरमानों को संजो रहे थे। वहीं शुक्रवार को पछुवा हवाओं के साथ हुई तेज बारिश व ओलावृष्टि से गेंहू की खड़ी फसल खेतों में गिर गई है। भोर से शुरू हुई बारिश रूक-रूककर दोपहर तक जारी रही। इससे किसानों की चिंता बढ़ा गई।
करीब चार माह से बारिश न होने से बेहाल किसानों ने जैसे-तैसे कर रबी फसल की पैदावार की थी। मगर शुक्रवार की भोर से चले पछुवा हवाओं के साथ बारिश और दर्जनों जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई। इससे खेतों में खड़ी अधिकांश गेंहू की फसल धराशाई हो गई तो वहीं पक चुके सरसों की फसल ओले के कारण खेतों में ही झड़ गई। यह देख किसान मायूस हो उठे। किसान गोपाल मिश्रा, बजरंगबली, मुरली, दीनानाथ शुक्ला, अंबिका प्रसाद, रामकपिल, जयनरायण, पंकज दुबे, राजेश शुक्ला, बब्लू साहू आदि किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि और बारिश से गेहूं की फसल खेत में गिर गई है। अगर हवाएं चलीं और बारिश हुई तो गेंहू की पैदावार काफी कम हो जाएगी। वहीं गेहूं के दानों में विकास भी कम हो जाएगा।